राष्ट्रीय

CourtVerdict – ठाणे हमले के मामले में तीनों आरोपियों को मिली राहत

CourtVerdict – महाराष्ट्र के ठाणे की एक अदालत ने वर्ष 2018 में पुलिस कांस्टेबल के साथ कथित मारपीट और धमकी देने के मामले में तीन आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए साक्ष्य कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करते हैं और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं किया जा सका। इसी आधार पर मुजाराम उर्फ रामभाऊ बापूराव येनकुरे, सुनील गणपत रोकड़े और बालू बापूराव येनकुरे को बरी कर दिया गया।

अदालत ने जांच की प्रक्रिया पर जताई चिंता

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जी. टी. पवार ने अपने आदेश में जांच के तरीके पर गंभीर टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि मामले से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को रिकॉर्ड में पर्याप्त रूप से नहीं लाया गया। न्यायालय के अनुसार, उपलब्ध साक्ष्यों को देखने पर आरोपियों की ओर से रखा गया पक्ष प्रथम दृष्टया अधिक संभावित प्रतीत होता है। फैसले में यह भी उल्लेख किया गया कि जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाने वाले कई पहलू सामने आए।

होली के दौरान हुई थी कथित घटना

अभियोजन के अनुसार, यह मामला 2 मार्च 2018 का है। शिकायतकर्ता पुलिस कांस्टेबल नवनाथ सदाशिव थोरवे ने होली के दिन ठाणे के येऊर गेट क्षेत्र में एक मोटरसाइकिल को जांच के लिए रोका था। पुलिस का दावा था कि वाहन पर सवार लोग शराब के प्रभाव में थे। आरोप लगाया गया कि वाहन जब्त किए जाने के बाद आरोपियों ने कांस्टेबल के साथ अभद्र व्यवहार किया, गाली-गलौज की और उन पर हाथ उठाया।

मेडिकल साक्ष्य बने सुनवाई का अहम हिस्सा

मुकदमे के दौरान प्रस्तुत मेडिकल रिकॉर्ड ने मामले की दिशा बदल दी। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मेडिकल अधिकारी की गवाही से यह तथ्य सामने आया कि परीक्षण के समय शिकायतकर्ता कांस्टेबल स्वयं भी नशे की स्थिति में था। न्यायालय ने माना कि यह जानकारी मामले के मूल्यांकन में महत्वपूर्ण थी और इससे अभियोजन की कहानी पर प्रभाव पड़ा।

जांच अधिकारी पर महत्वपूर्ण तथ्य छिपाने का उल्लेख

फैसले में अदालत ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि जांच के दौरान पूरी मेडिकल जानकारी रिकॉर्ड में नहीं लाई गई। न्यायालय ने टिप्पणी की कि शिकायतकर्ता की स्थिति से जुड़ी जानकारी को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। अदालत के अनुसार, उपलब्ध दस्तावेजों से यह भी संकेत मिला कि पूछताछ के समय कांस्टेबल स्पष्ट और सुसंगत जवाब देने की स्थिति में नहीं था।

कई साक्ष्यों में दिखी असंगति

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पाया कि अभियोजन पक्ष कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज पेश करने में असफल रहा। फैसले में कहा गया कि कथित रूप से शराब पीकर वाहन चलाने के आरोप से जुड़ी ब्रीथ एनालाइजर रिपोर्ट रिकॉर्ड पर नहीं लाई गई। साथ ही आरोपियों को लगी चोटों का संतोषजनक स्पष्टीकरण भी नहीं दिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों में मौजूद विरोधाभासों ने भी मामले को और कमजोर किया।

संदेह का लाभ मिलने से आरोपियों को राहत

न्यायालय ने कहा कि आपराधिक मामलों में आरोपों को ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर सिद्ध किया जाना आवश्यक होता है। इस मामले में प्रस्तुत प्रमाण कई स्तरों पर संदेह पैदा करते हैं, इसलिए आरोपियों को दोषी ठहराना संभव नहीं था। अदालत ने सभी परिस्थितियों पर विचार करने के बाद तीनों आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया, जिससे उन्हें कानूनी राहत मिल गई।

Back to top button

Adblock Detected

Please disable your AdBlocker first, and then you can watch everything easily.