राष्ट्रीय

AssemblySession – तमिलनाडु विधानसभा सत्र से पहले प्रोटोकॉल विवाद पर बढ़ी नजरें

AssemblySession – तमिलनाडु विधानसभा का नया सत्र 18 जून से शुरू होने जा रहा है, जिसकी शुरुआत राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर के अभिभाषण से होगी। हालांकि इस बार चर्चा केवल सरकार के विधायी एजेंडे तक सीमित नहीं है, बल्कि आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम, राष्ट्रगान और तमिलथाई वाझथु के गायन के क्रम को लेकर चल रही बहस भी केंद्र में बनी हुई है। राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर उत्सुकता है कि सत्र की शुरुआत पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगी या फिर यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा का विषय बनेगा।

औपचारिक परंपरा से राजनीतिक बहस तक का सफर

राज्य में विधानसभा सत्र का उद्घाटन पहले एक सामान्य संवैधानिक प्रक्रिया माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह कई बार राजनीतिक विवादों से भी जुड़ गया। पूर्व राज्यपाल आर.एन. रवि के कार्यकाल के दौरान विधानसभा अभिभाषण और आधिकारिक कार्यक्रमों से जुड़े कई मुद्दों पर सरकार और राजभवन के बीच मतभेद सामने आए थे। इनमें राष्ट्रीय प्रतीकों के उपयोग और कार्यक्रमों के प्रोटोकॉल से जुड़े प्रश्न प्रमुख रहे।

शपथ ग्रहण समारोह के बाद तेज हुई चर्चा

हाल में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और उनके मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान वंदे मातरम और राष्ट्रगान के बाद तमिलथाई वाझथु प्रस्तुत किया गया था। इसके बाद आयोजित मंत्रिमंडल विस्तार समारोह में भी यही क्रम अपनाया गया। इस व्यवस्था पर विपक्षी दलों, विशेषकर डीएमके और उसके सहयोगी दलों ने आपत्ति जताई। उनका कहना था कि राज्य की सांस्कृतिक परंपरा के अनुसार तमिलथाई वाझथु को कार्यक्रम की शुरुआत में स्थान मिलना चाहिए।

सांस्कृतिक पहचान को लेकर उठे सवाल

विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि पारंपरिक व्यवस्था में बदलाव से तमिल सांस्कृतिक पहचान से जुड़े प्रतीकों का महत्व कम हो सकता है। उनका मानना है कि तमिलथाई वाझथु लंबे समय से राज्य के सरकारी आयोजनों का अभिन्न हिस्सा रहा है और उसकी स्थापित परंपरा को बनाए रखा जाना चाहिए। इसी कारण यह विषय राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।

केरल की घटना के बाद बढ़ी दिलचस्पी

इस पूरे मामले में पड़ोसी राज्य केरल की एक हालिया घटना का भी उल्लेख किया जा रहा है। मई में केरल विधानसभा के उद्घाटन सत्र के दौरान राज्यपाल के संबोधन से पहले और बाद में वंदे मातरम का संक्षिप्त संस्करण प्रस्तुत किया गया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस व्यवस्था को लेकर कुछ आपत्तियां सामने आई थीं। चूंकि राजेंद्र अर्लेकर केरल के राज्यपाल की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं, इसलिए तमिलनाडु में होने वाले आगामी सत्र पर भी लोगों की नजर बनी हुई है।

राज्य सरकार ने रखा अपना पक्ष

तमिलनाडु सरकार का कहना है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि तमिलथाई वाझथु जैसे राज्य स्तरीय आह्वान गीतों को सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत में नहीं गाया जा सकता। सरकार के अनुसार इस विषय पर कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं की समीक्षा की जा रही है ताकि राज्य की परंपराओं और निर्धारित प्रोटोकॉल के बीच संतुलन बना रहे।

प्रधानमंत्री से भी उठाया गया मुद्दा

सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 27 मई को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान भी इस विषय को उठाया था। बताया जाता है कि उन्होंने केंद्र से दिशा-निर्देशों में आवश्यक स्पष्टता देने का अनुरोध किया, जिससे राज्यों के पारंपरिक आह्वान गीतों की भूमिका को लेकर किसी तरह का भ्रम न रहे।

सत्र के उद्घाटन पर रहेंगी सबकी निगाहें

18 जून को होने वाला राज्यपाल का अभिभाषण केवल विधानसभा सत्र की औपचारिक शुरुआत नहीं होगा, बल्कि यह भी संकेत देगा कि प्रोटोकॉल को लेकर चल रही बहस किस दिशा में आगे बढ़ रही है। राजनीतिक दलों, प्रशासनिक हलकों और आम लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस मुद्दे पर सहमति बन चुकी है या फिर आने वाले दिनों में इस पर नई राजनीतिक चर्चा देखने को मिलेगी।

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