बिहार

LandDispute – थाना परिसर की जमीन की कथित रजिस्ट्री से उठा बड़ा विवाद

LandDispute – बिहार के पूर्वी चंपारण जिले से भूमि विवाद का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक प्रक्रियाओं और भूमि प्रबंधन व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला भारत-नेपाल सीमा के निकट स्थित झरौखर थाना क्षेत्र का है, जहां नए थाना भवन के निर्माण के दौरान जमीन को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है।

जानकारी के अनुसार, जिस भूमि पर नया थाना भवन तैयार किया जा रहा है, उसी परिसर के एक हिस्से की कथित रजिस्ट्री किए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है और पूरे प्रकरण की जांच की मांग उठ रही है।

निर्माणाधीन थाना परिसर बना विवाद का केंद्र

झरौखर क्षेत्र में बिहार सरकार की ओर से नए थाना भवन का निर्माण कराया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना के लिए खरीदी गई भूमि और सरकारी श्रेणी की जमीन को मिलाकर परिसर विकसित किया गया है। भवन निर्माण का कार्य अंतिम चरण में बताया जा रहा है और परिसर की चारदीवारी भी लगभग पूरी हो चुकी है।

इसी बीच यह दावा सामने आया कि परिसर के भीतर स्थित कुछ हिस्से की जमीन का पंजीकरण निजी व्यक्तियों के नाम पर कर दिया गया है। इसके बाद से मामले ने नया मोड़ ले लिया है।

पहले हुई थी आधिकारिक मापी

निर्माण कार्य से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि भवन निर्माण शुरू होने से पहले संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में भूमि का सीमांकन और मापी की गई थी। इसी आधार पर नक्शा तैयार किया गया और निर्माण कार्य आगे बढ़ाया गया।

अधिकारियों के मुताबिक, उस समय लगाए गए सीमांकन चिह्नों और स्वीकृत अभिलेखों के आधार पर पूरी परियोजना संचालित की गई। ऐसे में बाद में हुई किसी नई मापी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

दोबारा मापी को लेकर उठे प्रश्न

विभागीय अधिकारियों ने कहा है कि हाल में दोबारा भूमि मापी की प्रक्रिया किस आधार पर शुरू की गई, इसकी स्पष्ट जानकारी उनके पास नहीं है। उनका मानना है कि यदि जमीन पहले से चिन्हित और अभिलेखों में दर्ज थी, तो नए सिरे से मापी की आवश्यकता और प्रक्रिया की जांच की जानी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकारी उपयोग की भूमि से जुड़ा कोई विवाद सामने आया है, तो इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि तथ्य स्पष्ट हो सकें।

स्थानीय स्तर पर लग रहे विभिन्न आरोप

मामले को लेकर क्षेत्र में कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। कुछ स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि भूमि के कथित लेन-देन में प्रभावशाली व्यक्तियों की भूमिका हो सकती है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों की ओर से सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया भी सामने नहीं आई है।

भूमि से जुड़े एक पक्ष ने अनौपचारिक बातचीत में दावा किया कि उन्हें केवल जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा गया था, जबकि आगे की जिम्मेदारी अन्य लोगों द्वारा संभालने की बात कही गई थी।

जांच की मांग तेज

विवाद सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और विभिन्न सामाजिक समूहों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि भूमि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज थी, तो उसके पंजीकरण की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई, इसकी विस्तृत पड़ताल होनी चाहिए।

साथ ही यह भी सवाल उठ रहे हैं कि भूमि मापी, पंजीकरण और प्रशासनिक अनुमतियों से जुड़ी प्रक्रियाओं में सभी नियमों का पालन हुआ था या नहीं।

कई विभागों पर टिकी निगाहें

इस पूरे प्रकरण ने प्रशासनिक विभागों, भूमि अभिलेख तंत्र और पंजीकरण प्रक्रिया को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच के दौरान क्या तथ्य सामने आते हैं और संबंधित विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं।

फिलहाल विवाद के कारण निर्माण कार्य और भूमि स्वामित्व से जुड़े प्रश्न चर्चा का विषय बने हुए हैं। मामले की आगे की जांच और प्रशासनिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Adblock Detected

Please disable your AdBlocker first, and then you can watch everything easily.