AI Economy – डिजिटल प्रगति में भारत ने बनाई वैश्विक पहचान, पांचवें स्थान पर पहुंचा…
AI Economy – भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था ने वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। ‘स्टेट ऑफ इंडिया डिजिटल इकोनॉमी (SIDE) 2026’ रिपोर्ट के अनुसार, देश अब दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई से जुड़ी वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत चौथे स्थान पर पहुंच गया है। इस उपलब्धि के साथ भारत ने जर्मनी, फ्रांस, जापान और कनाडा जैसे कई विकसित देशों को पीछे छोड़ दिया है।

एआई अपनाने में विकासशील देशों की बढ़ती भूमिका
रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक डिजिटल परिदृश्य तेजी से बदल रहा है और अब एआई तकनीक का उपयोग केवल विकसित देशों तक सीमित नहीं रहा। दुनिया के लगभग 72 प्रतिशत एआई उपयोगकर्ता विकासशील देशों में हैं। भारत और चीन मिलकर वैश्विक एआई उपयोगकर्ताओं का बड़ा हिस्सा बनाते हैं। जनरेटिव एआई को अब तक की सबसे तेज़ी से अपनाई जाने वाली तकनीकों में गिना जा रहा है, जिसने कम समय में व्यापक स्तर पर पहुंच बनाई है।
डिजिटल शक्ति संतुलन में दिख रहा नया बदलाव
अध्ययन में यह भी सामने आया है कि दुनिया की शीर्ष पांच डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं में चीन, सिंगापुर और भारत जैसे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के तीन देशों की मौजूदगी वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव का संकेत देती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि डिजिटल नेतृत्व अब केवल पारंपरिक पश्चिमी देशों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि एशियाई देशों की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।
डिजिटल बुनियादी ढांचे ने दी मजबूती
आईसीआरआईईआर के चेयरपर्सन प्रमोद भसीन के अनुसार, भारत ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, बेहतर कनेक्टिविटी और उद्यमिता को बढ़ावा देकर मजबूत आधार तैयार किया है। उनका मानना है कि आने वाले वर्षों में देश की प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि एआई आधारित नवाचारों को किस हद तक प्रभावी रूप से अपनाया जाता है और डिजिटल सेवाओं में भरोसा कितना मजबूत बनाया जाता है।
डिजिटल उपभोक्ता से डिजिटल नेतृत्व तक का सफर
आईसीआरआईईआर से जुड़े विशेषज्ञ डॉ. दीपक मिश्रा का कहना है कि भारत अब केवल तकनीक का उपयोग करने वाला देश नहीं है, बल्कि डिजिटल क्षेत्र में नेतृत्व की भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस बदलाव को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए अनुसंधान, नवाचार और मजबूत संस्थागत ढांचे में निवेश बढ़ाने की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि नीति निर्माण में दूरदर्शिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।
सेवाओं के निर्यात में भारत की मजबूत मौजूदगी
रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाओं के व्यापार में 328 अरब अमेरिकी डॉलर का स्तर हासिल किया है। सॉफ्टवेयर, सूचना प्रौद्योगिकी सेवाएं और क्लाउड आधारित समाधान देश के प्रमुख निर्यात क्षेत्रों में शामिल हैं। अपेक्षाकृत कम-मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्था होने के बावजूद भारत ने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है।
एआई प्रतिभा है मजबूत, निवेश बढ़ाने की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास अमेरिका के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एआई प्रतिभा समूह मौजूद है। साथ ही विशाल तकनीकी उपभोक्ता आधार और मजबूत डिजिटल अवसंरचना देश को अतिरिक्त बढ़त प्रदान करते हैं। हालांकि, निजी एआई निवेश और उन्नत कंप्यूटिंग संसाधनों के मामले में अभी भी सुधार की पर्याप्त गुंजाइश है। विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप्स और उद्योगों के बीच बेहतर सहयोग को भी भविष्य की जरूरत माना गया है।
साइबर सुरक्षा और समावेशन पर भी फोकस जरूरी
रिपोर्ट ने यह भी संकेत दिया है कि तेज़ डिजिटलीकरण के साथ नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। साइबर अपराध, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, डिजिटल असमानता और पर्यावरणीय प्रभाव जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल विकास को सुरक्षित और टिकाऊ बनाने के लिए साइबर सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करना होगा।
भविष्य की प्रतिस्पर्धा का आधार बनेगी घरेलू क्षमता
रिपोर्ट के अनुसार, उन्नत एआई चिप्स, बड़े भाषा मॉडल और उच्च क्षमता वाले कंप्यूटिंग संसाधन अभी भी सीमित देशों और कंपनियों के नियंत्रण में हैं। ऐसे में भारत की दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह अपनी घरेलू एआई क्षमताओं को कितना मजबूत बनाता है और नवाचार को आर्थिक मूल्य में बदलने की दिशा में कितनी तेजी से आगे बढ़ता है।