SoybeanMarket – सोयाबीन की बढ़ती कीमतों से बदले कारोबार के समीकरण
SoybeanMarket – देश में पिछले कुछ हफ्तों के दौरान सोयाबीन और सोयामील की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी ने कृषि कारोबार और निर्यात बाजार दोनों को प्रभावित किया है। घरेलू बाजार में दाम अचानक बढ़ने से भारतीय निर्यातकों को बड़े स्तर पर अपने निर्यात सौदे रद्द करने पड़े हैं। इसके साथ ही देश में मांग को पूरा करने के लिए विदेशों से सोयाबीन आयात की तैयारी भी तेज हो गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नई फसल बाजार में आने तक आपूर्ति सीमित रह सकती है। ऐसे में इस वर्ष सोयाबीन आयात का स्तर रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
क्यों बढ़ीं सोयाबीन और सोयामील की कीमतें?
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खाद्य तेल और जैव ईंधन की मांग बढ़ने से सोयाबीन की उपलब्धता प्रभावित हुई है। कई देशों ने जैव ईंधन मिश्रण की अनिवार्य सीमा बढ़ा दी है, जिसके कारण सोयाबीन और खाद्य तेलों का बड़ा हिस्सा ईंधन उत्पादन में इस्तेमाल होने लगा है।
इसका असर भारत समेत कई देशों के बाजार पर पड़ा है। घरेलू बाजार में सोयाबीन महंगा होने से सोयामील की कीमत भी तेजी से बढ़ी और यह करीब 66 हजार रुपये प्रति टन तक पहुंच गई। सोयामील का इस्तेमाल मुख्य रूप से पशु आहार के रूप में किया जाता है।
निर्यात सौदे रद्द करने पड़े
कीमतों में अचानक आई तेजी के कारण भारतीय निर्यातकों को अपने कई पुराने सौदे रद्द करने पड़े। जानकारी के मुताबिक, मई और जून शिपमेंट से जुड़े लगभग 25 हजार टन सोयामील निर्यात के अनुबंध आपसी सहमति से समाप्त किए गए।
बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के मुकाबले घरेलू लागत काफी बढ़ गई थी। ऐसे में पहले तय दरों पर निर्यात करना कारोबारी दृष्टि से संभव नहीं रह गया था।
विदेशों से बढ़ा आयात
घरेलू मांग को देखते हुए भारतीय कारोबारियों ने अफ्रीकी देशों से करीब 80 हजार टन सोयाबीन आयात के सौदे किए हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है that इस साल कुल आयात 8 लाख टन तक पहुंच सकता है, जो अब तक का सबसे बड़ा स्तर माना जा रहा है।
कमोडिटी बाजार से जुड़े जानकारों का कहना है कि उत्पादन के आंकड़ों को लेकर सरकार, उद्योग और व्यापारियों के बीच अलग-अलग अनुमान सामने आ रहे हैं। इसी कारण बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
उत्पादन को लेकर क्या कहती है रिपोर्ट?
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, फसल वर्ष 2025-26 में देश में सोयाबीन उत्पादन लगभग 125 लाख टन से अधिक रह सकता है। हालांकि मौसम संबंधी जोखिम और अल नीनो की आशंका को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मानसून सामान्य नहीं रहा तो उत्पादन और आपूर्ति दोनों प्रभावित हो सकते हैं। इससे आने वाले महीनों में कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है।
अनाज उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
इसी बीच कृषि मंत्रालय ने देश में कुल अनाज उत्पादन को लेकर सकारात्मक आंकड़े जारी किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025-26 में कुल अनाज उत्पादन 3765 लाख टन से अधिक रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर माना जा रहा है।
चावल, गेहूं और मक्का उत्पादन में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खासतौर पर मक्का उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है। इसके अलावा मोटे अनाज और दलहन फसलों का उत्पादन भी स्थिर बना हुआ है।
बाजार पर आगे क्या होगा असर?
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेल और ऊर्जा की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो भारतीय बाजार में भी सोयाबीन और उससे जुड़े उत्पाद महंगे बने रह सकते हैं। इसका असर पशु आहार, खाद्य तेल और कई कृषि आधारित उद्योगों पर पड़ सकता है।
आने वाले महीनों में सरकार की नीतियां, मानसून की स्थिति और वैश्विक बाजार का रुख तय करेगा कि कीमतों में राहत मिलती है या दबाव और बढ़ता है।