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QuadMeeting – वैश्विक तनाव के बीच जयशंकर ने समन्वय पर दिया जोर

QuadMeeting – क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक में भारत ने वैश्विक सहयोग और सामरिक संतुलन की जरूरत पर जोर दिया। इस बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री भी शामिल हुए। बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच यह बैठक काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

बैठक की शुरुआत में अपने संबोधन के दौरान जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में समान सोच रखने वाले देशों के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने संकेत दिया कि दुनिया तेजी से बदलते रणनीतिक माहौल से गुजर रही है, जहां साझेदारी और संवाद की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो चुकी है।

पश्चिम एशिया के हालात पर भी हुई चर्चा

विदेश मंत्री ने अपने वक्तव्य में पश्चिम एशिया की स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने क्षेत्र में जारी तनाव और उसके वैश्विक प्रभाव की ओर ध्यान आकर्षित किया। हाल के महीनों में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े टकराव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ाई है और इसका असर ऊर्जा सुरक्षा से लेकर वैश्विक व्यापार तक कई क्षेत्रों पर पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में क्वाड जैसे मंच की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है। यह समूह केवल सुरक्षा सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता, समुद्री सुरक्षा और आर्थिक साझेदारी जैसे मुद्दों पर भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया भी शामिल

बैठक में अमेरिका की ओर से विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने हिस्सा लिया। जापान और ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधियों ने भी क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर अपने विचार रखे। सभी देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और नियम-आधारित व्यवस्था को समर्थन देने की प्रतिबद्धता दोहराई।

कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक बैठक में सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, तकनीकी साझेदारी और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। क्वाड देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक सहयोग लगातार मजबूत हुआ है।

भारत ने संतुलित वैश्विक दृष्टिकोण रखा

जयशंकर ने अपने संबोधन में वैश्विक शक्ति संतुलन की बदलती तस्वीर पर भी बात की। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच संवाद और सहयोग को प्राथमिकता देना जरूरी है। भारत लंबे समय से बहुपक्षीय सहयोग और संतुलित कूटनीति का समर्थन करता रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार भारत इस मंच के जरिए क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक और तकनीकी सहयोग को भी मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। क्वाड देशों के बीच बढ़ती साझेदारी को हिंद-प्रशांत क्षेत्र की रणनीतिक राजनीति में अहम माना जा रहा है।

क्वाड की बढ़ती भूमिका पर नजर

हाल के वर्षों में क्वाड समूह की सक्रियता लगातार बढ़ी है। पहले इसे मुख्य रूप से सामरिक सहयोग के मंच के तौर पर देखा जाता था, लेकिन अब यह स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, तकनीक और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।

विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक अस्थिरता और क्षेत्रीय चुनौतियों के दौर में क्वाड देशों की एकजुटता आने वाले समय में और महत्वपूर्ण हो सकती है। इस बैठक को भी उसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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