उत्तराखण्ड

TeaIndustry – उत्तराखंड की चाय खेती ने बढ़ाई किसानों की नई उम्मीदें

TeaIndustry – दार्जिलिंग और असम के बाद अब उत्तराखंड भी देश के प्रमुख चाय उत्पादक राज्यों में अपनी पहचान मजबूत करता दिखाई दे रहा है। राज्य के नौ जिलों में बड़े स्तर पर चाय की खेती की जा रही है और इससे हजारों परिवारों को रोजगार मिल रहा है। उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड अब उत्पादन बढ़ाने और किसानों को सीधे इस व्यवसाय से जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है।

राज्य में इस समय लगभग 1500 हेक्टेयर क्षेत्र में चाय की खेती हो रही है, जहां हर साल करीब सात लाख किलो हरी चाय पत्तियों का उत्पादन किया जा रहा है। इन पत्तियों से लगभग डेढ़ लाख किलो तैयार चाय बनाई जाती है। अब बोर्ड ने उत्पादन को बढ़ाकर 8.5 लाख किलो तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है।

किसानों को चाय उत्पादन के लिए प्रोत्साहन

उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड किसानों को अपनी जमीन पर सीधे चाय उत्पादन के लिए प्रेरित कर रहा है। फिलहाल कई किसान निजी स्तर पर चाय की खेती कर रहे हैं और बोर्ड उनसे हरी पत्तियां खरीद रहा है। अधिकारियों के अनुसार किसानों को प्रति किलो लगभग 40 रुपये की दर से भुगतान किया जा रहा है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय का स्रोत मिला है।

राज्य में चाय की पत्तियों को प्रोसेस करने के लिए पांच फैक्ट्रियां स्थापित की गई हैं। ये इकाइयां श्यामखेत, कौसानी, चंपावत, बागेश्वर और चमोली क्षेत्र में संचालित हो रही हैं। इसके अलावा नैनीताल में मृदा परीक्षण केंद्र भी बनाया गया है, जहां किसान अपनी भूमि की गुणवत्ता की जांच करवा सकते हैं।

महिलाओं को मिल रहा बड़ा रोजगार

चाय उद्योग से राज्य के करीब चार हजार परिवार सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। इस क्षेत्र में हर साल लगभग सात लाख मानव दिवस रोजगार सृजित हो रहा है। खास बात यह है कि इसमें महिलाओं की भागीदारी सबसे अधिक है।

महिलाएं खेत तैयार करने से लेकर पत्तियां तोड़ने तक विभिन्न कामों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। कई किसान अपनी जमीन चाय विकास बोर्ड को लीज पर देते हैं और बाद में उसी खेत में काम करके मजदूरी भी प्राप्त करते हैं। इससे उन्हें दोहरा आर्थिक लाभ मिल रहा है।

जैविक चाय की बढ़ रही मांग

उत्तराखंड की चाय अपनी गुणवत्ता और ताजगी के कारण धीरे-धीरे बाजार में पहचान बना रही है। राज्य में लगभग 450 हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक तरीके से चाय की खेती की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऑर्गेनिक और ग्रीन टी की बढ़ती मांग किसानों के लिए नए अवसर लेकर आई है।

थोक बाजारों में जैविक चाय को पारंपरिक चाय की तुलना में बेहतर कीमत मिल रही है। उत्तराखंड में उत्पादित चाय का बड़ा हिस्सा कोलकाता की चाय मंडियों तक पहुंच रहा है, जहां देश और विदेश के खरीदार इसमें रुचि दिखा रहे हैं।

टी टूरिज्म पर भी सरकार की नजर

चाय उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ राज्य में टी टूरिज्म को भी विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि यदि पर्यटकों को स्थानीय चाय बागानों और उत्पादन प्रक्रिया से जोड़ा जाए तो इससे किसानों की आय बढ़ सकती है।

हालांकि उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड अभी आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। श्रमिकों की लागत और संचालन खर्च बढ़ने से बोर्ड घाटे में चल रहा है। इसके बावजूद सरकार और बोर्ड किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए नई योजनाओं पर काम कर रहे हैं।

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