Tribute – राजकीय सम्मान के साथ बीसी खंडूड़ी को दी गई अंतिम विदाई
Tribute – उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और सेवानिवृत्त मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी को बुधवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। हरिद्वार के खड़खड़ी श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। सेना और पुलिस के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर उन्हें अंतिम सलामी दी। उनकी अंतिम यात्रा में राजनीतिक, सामाजिक और सैन्य क्षेत्र से जुड़े कई लोग शामिल हुए।

द्वार पहुंचकर खंडूड़ी को श्रद्धांजलि दी। उनके निधन पर पूरे प्रदेश में शोक की लहर देखी गई। राज्य सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री के सम्मान में तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है।
उपराष्ट्रपति और नेताओं ने जताया शोक
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने बीसी खंडूड़ी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि देश ने एक ऐसे व्यक्ति को खो दिया है जिसने सैनिक, प्रशासक और जनप्रतिनिधि के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में उनकी ईमानदारी और अनुशासन हमेशा याद रखा जाएगा।
बुधवार सुबह उपराष्ट्रपति देहरादून स्थित खंडूड़ी के आवास पहुंचे और उनके पार्थिव शरीर पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने परिवार के सदस्यों से मुलाकात कर संवेदना भी व्यक्त की। केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी और अन्य नेताओं के भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल होने की जानकारी सामने आई।
लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे खंडूड़ी
मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी पिछले कई महीनों से अस्वस्थ थे। उन्हें एक अप्रैल को देहरादून के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, चिकित्सकीय जांच में आंतों में रक्तस्राव की समस्या सामने आई थी और विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा था।
करीब 49 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद मंगलवार सुबह उनका निधन हो गया। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, सुबह उन्हें हल्का हृदयाघात आया, जिसके बाद चिकित्सकों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। उन्होंने 91 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली।
सैन्य और राजनीतिक जीवन रहा उल्लेखनीय
बीसी खंडूड़ी का नाम उत्तराखंड की राजनीति में एक साफ-सुथरी छवि वाले नेता के रूप में लिया जाता है। सेना में लंबे समय तक सेवा देने के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन में कदम रखा और बाद में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने। उनके कार्यकाल को प्रशासनिक सख्ती और पारदर्शिता के लिए याद किया जाता है।
राजनीतिक सहयोगियों और सामाजिक संगठनों ने कहा कि खंडूड़ी ने हमेशा जनहित को प्राथमिकता दी। उनके निधन को उत्तराखंड की राजनीति और सार्वजनिक जीवन के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है।
प्रदेश में शोक, स्कूल और कार्यालय बंद
राज्य सरकार ने उनके निधन पर तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। इसी के तहत बुधवार को प्रदेश के सरकारी, निजी और सहायता प्राप्त स्कूल बंद रखने के आदेश जारी किए गए। कई सरकारी कार्यक्रम भी स्थगित कर दिए गए हैं।
शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री के सम्मान में यह निर्णय लिया गया है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी लोगों ने शोक सभाएं आयोजित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।