SupremeCourt – नवी मुंबई एयरपोर्ट नामकरण मामले में हस्तक्षेप से इनकार
SupremeCourt – सुप्रीम कोर्ट ने नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नामकरण से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। अदालत में केंद्र सरकार को महाराष्ट्र सरकार के प्रस्ताव पर तय समय सीमा के भीतर निर्णय लेने का निर्देश देने की मांग की गई थी। महाराष्ट्र सरकार ने एयरपोर्ट का नाम बदलकर ‘लोकनेता डी.बी. पाटिल नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ करने का प्रस्ताव भेजा था।

अदालत ने बताया नीति से जुड़ा मामला
मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट कहा कि एयरपोर्ट का नाम तय करना नीति निर्माण से जुड़ा विषय है और इसमें न्यायालय सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकता। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पांचोली भी शामिल थे। अदालत ने याचिकाकर्ता संस्था के वकील से कहा कि इस प्रकार के फैसले प्रशासनिक और सरकारी स्तर पर लिए जाते हैं।
हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी
यह याचिका बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दाखिल की गई थी, जिसमें पहले ही मामले को खारिज कर दिया गया था। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि याचिकाकर्ता अपनी मांग संबंधित प्राधिकरण के सामने रख सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी रुख को बरकरार रखते हुए कहा कि अदालत किसी एयरपोर्ट का नाम क्या होना चाहिए, इस पर फैसला देने की जगह नहीं है।
प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा मामला
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद फिलहाल एयरपोर्ट नामकरण का विवाद न्यायिक दायरे से बाहर हो गया है। अब इस मामले पर आगे की कार्रवाई प्रशासनिक और सरकारी प्रक्रियाओं के जरिए ही होगी। अदालत की टिप्पणी के बाद यह साफ हो गया है कि नाम बदलने जैसे मुद्दों पर अंतिम निर्णय सरकार और संबंधित प्राधिकरणों के स्तर पर लिया जाएगा।
ट्रिब्यूनल सदस्यों को भी मिली राहत
इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के विभिन्न ट्रिब्यूनलों में कार्यरत अध्यक्षों और सदस्यों को बड़ी राहत देते हुए उनका कार्यकाल बढ़ाने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि जिन अधिकारियों का कार्यकाल जल्द समाप्त होने वाला है, वे अब 8 सितंबर 2026 तक अपने पद पर बने रह सकेंगे। यह फैसला न्यायिक कामकाज में रुकावट से बचने के उद्देश्य से लिया गया।
एनजीटी सदस्य के मामले में हुई चर्चा
सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी एनजीटी के एक न्यायिक सदस्य के कार्यकाल समाप्त होने का मुद्दा भी उठाया गया। अदालत को बताया गया कि उनका कार्यकाल जून में खत्म होने वाला है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उनके साथ अन्य संबंधित अधिकारियों का कार्यकाल भी बढ़ाने का निर्देश दिया।
चयन प्रक्रिया पूरी होने तक जारी रहेगा कार्यकाल
केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने भी कार्यकाल बढ़ाने के फैसले पर सहमति जताई। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि नई नियुक्तियों और विस्तार पर विचार करने के लिए चयन समिति की बैठक सितंबर में प्रस्तावित है। ऐसे में तब तक मौजूदा अधिकारियों का पद पर बने रहना जरूरी है, ताकि न्यायिक और प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हों।