HormonalHealth – अब पीएमओएस रखा गया पीसीओएस का नया नाम, महिलाओं में है आम…
HormonalHealth – महिलाओं में तेजी से बढ़ रही हार्मोनल समस्याओं को लेकर चिकित्सा जगत में एक बड़ा बदलाव किया गया है। लंबे समय से प्रचलित पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यानी पीसीओएस को अब नए नाम से पहचाना जाएगा। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की सहमति के बाद इस स्थिति का नया नाम “पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम” यानी पीएमओएस रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि नया नाम इस समस्या की वास्तविक और व्यापक प्रकृति को बेहतर तरीके से दर्शाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार पीसीओएस सिर्फ अंडाशय से जुड़ी बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर के कई हार्मोन सिस्टम, मेटाबॉलिज्म और मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती है। इसी कारण पुराने नाम को अधूरा और भ्रम पैदा करने वाला माना जा रहा था।
क्यों बदला गया पीसीओएस का नाम
मलेशिया स्थित मोनाश यूनिवर्सिटी की अगुवाई में दुनियाभर के विशेषज्ञों ने इस विषय पर अध्ययन किया। शोध के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि “पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम” नाम में केवल ओवरी और सिस्ट पर अधिक जोर दिया गया था, जबकि कई महिलाओं में सिस्ट बनते ही नहीं हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति में हार्मोन असंतुलन, इंसुलिन रेजिस्टेंस, मेटाबॉलिक समस्याएं और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े प्रभाव भी शामिल होते हैं। इसलिए नए नाम “पीएमओएस” में इन सभी पहलुओं को शामिल करने की कोशिश की गई है।
महिलाओं में क्यों बढ़ रही है यह समस्या
पीसीओएस या पीएमओएस महिलाओं में होने वाली आम हार्मोनल समस्याओं में से एक मानी जाती है। इसके कारण पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं, वजन बढ़ सकता है, चेहरे और शरीर पर अतिरिक्त बाल आने लगते हैं और मुंहासों की समस्या भी बढ़ सकती है।
कुछ मामलों में गर्भधारण में कठिनाई भी देखी जाती है। विशेषज्ञ खराब जीवनशैली, तनाव, शारीरिक गतिविधि की कमी और असंतुलित खानपान को इसके प्रमुख कारणों में गिनते हैं। भारत सहित कई देशों में यह समस्या बड़ी संख्या में महिलाओं को प्रभावित कर रही है।
पीसीओडी और पीसीओएस में क्या अंतर
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि पीसीओडी और पीसीओएस को अक्सर एक जैसा समझ लिया जाता है, जबकि दोनों स्थितियों में कुछ अंतर होते हैं। पीसीओडी यानी पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज में महिलाओं की ओवरी सामान्य से अधिक अपरिपक्व अंडे बनाने लगती है, जो बाद में छोटे सिस्ट का रूप ले सकते हैं।
इसके कारण हार्मोन असंतुलन बढ़ता है और पीरियड्स से जुड़ी समस्याएं शुरू हो सकती हैं। वहीं पीसीओएस या अब पीएमओएस को ज्यादा जटिल स्थिति माना जाता है, जिसमें शरीर के कई हार्मोन सिस्टम प्रभावित हो सकते हैं।
पीएमओएस में शरीर के कई सिस्टम प्रभावित
विशेषज्ञों के मुताबिक पीएमओएस शब्द इस समस्या के व्यापक असर को दर्शाता है। “पॉलीएंडोक्राइन” का अर्थ है कि शरीर की कई हार्मोन ग्रंथियां प्रभावित हो सकती हैं, जबकि “मेटाबॉलिक” शब्द ऊर्जा और शुगर मेटाबॉलिज्म से जुड़ी गड़बड़ियों की ओर संकेत करता है।
इस स्थिति में इंसुलिन, थायरॉयड, एड्रिनल और प्रजनन हार्मोन सभी प्रभावित हो सकते हैं। इसी वजह से यह केवल प्रजनन स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहती, बल्कि डायबिटीज, मोटापा और मानसिक स्वास्थ्य से भी जुड़ सकती है।
जागरूकता बढ़ाने पर दिया जा रहा जोर
स्वास्थ्य विशेषज्ञ महिलाओं को शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाह दे रहे हैं। समय पर जांच और जीवनशैली में सुधार के जरिए इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नए नाम के जरिए महिलाओं और समाज में इस स्थिति को लेकर बेहतर समझ विकसित होगी और इलाज के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।