झारखण्ड

WildlifeCrime – रांची में मॉनिटर लिजार्ड तस्करी मामले में तीन गिरफ्तार

WildlifeCrime – राजधानी रांची में वन विभाग ने अवैध वन्यजीव तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए मॉनिटर लिजार्ड की तस्करी से जुड़े एक मामले का खुलासा किया है। इस कार्रवाई में एक राजनीतिक दल से जुड़े स्थानीय नेता समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वन विभाग की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर शहर के डेली मार्केट इलाके स्थित एक होटल में छापेमारी कर तीन मृत मॉनिटर लिजार्ड बरामद किए।

अधिकारियों के मुताबिक यह कार्रवाई 14 मई को वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो से मिली सूचना के बाद की गई। शुरुआती जांच में यह मामला संगठित वन्यजीव तस्करी नेटवर्क से जुड़ा माना जा रहा है। विभाग अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटा है।

होटल के कमरे से बरामद हुए संरक्षित वन्यजीव

वन विभाग को सूचना मिली थी कि कुछ लोग होटल में ठहरकर प्रतिबंधित वन्यजीवों की खरीद-फरोख्त की तैयारी कर रहे हैं। इसके बाद विभाग की टीम ने डेली मार्केट स्थित नटराज होटल के कमरा नंबर 203 में छापा मारा।

जांच के दौरान कमरे से एक काले रंग के पैकेट में रखे तीन मृत मॉनिटर लिजार्ड बरामद किए गए। अधिकारियों ने मौके से तस्करी से जुड़ी अन्य सामग्री भी जब्त की है। वन विभाग का कहना है कि बरामद वन्यजीवों को किस उद्देश्य से रखा गया था और इन्हें कहां भेजा जाना था, इसकी जांच की जा रही है।

तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ

मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान राजीव रंजन मिश्रा, उनके बेटे अविनाश आनंद और अरुण राम के रूप में हुई है। राजीव रंजन मिश्रा रांची के बड़ा तालाब क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं।

अधिकारियों के अनुसार पूछताछ के दौरान आरोपी बरामद वन्यजीवों के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दे सके। वन विभाग अब आरोपियों के मोबाइल फोन, संपर्क सूत्रों और यात्रा से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रहा है ताकि तस्करी नेटवर्क के अन्य लोगों तक पहुंचा जा सके।

फर्जी पहचान के इस्तेमाल की भी जांच

होटल प्रबंधन की ओर से मिली जानकारी के अनुसार कमरा नंबर 203 और 206 को 13 मई को पश्चिम बंगाल निवासी विष्णु गुप्ता के नाम से बुक कराया गया था। अब यह जांच की जा रही है कि होटल में कमरा बुक कराने के लिए फर्जी पहचान का इस्तेमाल किया गया था या नहीं।

वन विभाग और संबंधित एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि मॉनिटर लिजार्ड की यह खेप किस राज्य या बाजार में भेजी जानी थी। अधिकारियों का कहना है कि मामले में अंतरराज्यीय नेटवर्क की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत दर्ज हुआ मामला

वन विभाग ने तीनों आरोपियों के खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की संशोधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। विभाग ने अदालत से आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग की है।

विशेषज्ञों के मुताबिक मॉनिटर लिजार्ड संरक्षित श्रेणी का वन्यजीव है और इसकी तस्करी जैव विविधता के लिए गंभीर खतरा मानी जाती है। अवैध वन्यजीव व्यापार का असर पर्यावरण संतुलन पर भी पड़ता है। वन विभाग ने साफ किया है कि राज्य में इस तरह की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

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