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LakhimpurCase – सुनवाई में देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी

LakhimpurCase – सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की सुनवाई में लगातार हो रही देरी पर गंभीर चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि पिछले लगभग दो महीनों से किसी भी गवाह की गवाही दर्ज नहीं हो पाई है, जबकि मामला बेहद संवेदनशील और सार्वजनिक महत्व से जुड़ा हुआ है। शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार से इस स्थिति पर विस्तृत जवाब मांगा है और ट्रायल कोर्ट को भी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ मामले से संबंधित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार की ओर से पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट पर असंतोष जताया। अदालत ने टिप्पणी की कि रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि गवाह अदालत में पेश क्यों नहीं हो रहे हैं और सुनवाई में रुकावट की वास्तविक वजह क्या है।

ट्रायल कोर्ट को दिए गए सख्त निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि किसी आपराधिक मामले की सुनवाई लंबे समय तक अटकी रहती है तो इससे न्याय प्रक्रिया प्रभावित होती है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट के पीठासीन अधिकारी को निर्देश दिया कि गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कानून के तहत उपलब्ध सभी जरूरी उपाय अपनाए जाएं।

पीठ ने यह भी कहा कि मामले की सुनवाई समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाई जानी चाहिए ताकि न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न हो। अदालत ने ट्रायल की प्रगति से जुड़ी नई रिपोर्ट अगली सुनवाई में पेश करने के लिए भी कहा है। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को मामले की गंभीरता और समय पर सुनवाई सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

2021 की हिंसा से जुड़ा है मामला

यह मामला 3 अक्तूबर 2021 को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया क्षेत्र में हुई हिंसक घटना से संबंधित है। उस दिन किसान उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के कार्यक्रम का विरोध कर रहे थे। आरोप है कि प्रदर्शन कर रहे किसानों के बीच एक एसयूवी वाहन घुस गया था, जिससे चार किसानों की मौत हो गई थी।

घटना के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया और हिंसा फैल गई। बाद में वाहन चालक और दो भाजपा कार्यकर्ताओं की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। इस पूरी घटना में एक पत्रकार की भी जान गई थी। हिंसा में कुल आठ लोगों की मृत्यु हुई थी, जिसके बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया था।

आशीष मिश्रा मुख्य आरोपी

मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा को मुख्य आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर दिसंबर 2023 में ट्रायल कोर्ट ने आशीष मिश्रा सहित 13 आरोपियों के खिलाफ हत्या, आपराधिक साजिश और अन्य गंभीर धाराओं में आरोप तय किए थे।

इसके बाद अदालत में नियमित सुनवाई शुरू हुई, लेकिन हाल के महीनों में गवाहों की अनुपस्थिति के कारण प्रक्रिया धीमी पड़ गई। सुप्रीम कोर्ट ने इसी पहलू पर चिंता जताते हुए कहा कि गंभीर मामलों में सुनवाई में देरी न्याय व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती है।

गवाहों की अनुपस्थिति पर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि गवाह लगातार पेश नहीं हो रहे हैं तो संबंधित एजेंसियों और प्रशासन को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। अदालत का मानना है कि न्यायिक प्रक्रिया तभी प्रभावी हो सकती है जब सभी पक्ष समय पर अदालत में उपस्थित हों और सुनवाई नियमित रूप से आगे बढ़े।

अब इस मामले में अगली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और ट्रायल कोर्ट की ओर से नई स्थिति रिपोर्ट पेश की जाएगी। माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट आगे भी इस केस की प्रगति पर नजर बनाए रख सकता है।

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