EVSavings – जानें पेट्रोल-डीजल वाहनों के मुकाबले कितनी सस्ती पड़ रहीं है इलेक्ट्रिक कारें…
EVSavings – महंगे ईंधन के दौर में अब कार खरीदते समय लोग सिर्फ कीमत नहीं, बल्कि उसकी रनिंग कॉस्ट पर भी गंभीरता से ध्यान देने लगे हैं। खासकर इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती लोकप्रियता के पीछे सबसे बड़ा कारण कम खर्च में लंबी दूरी तय करने की क्षमता मानी जा रही है। हाल में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, इलेक्ट्रिक एसयूवी की रनिंग कॉस्ट पेट्रोल और डीजल गाड़ियों की तुलना में कई गुना कम पड़ रही है।

500 किलोमीटर की दूरी में बड़ा खर्च अंतर
अगर एक आधुनिक इलेक्ट्रिक एसयूवी की तुलना पारंपरिक पेट्रोल और डीजल गाड़ियों से करें तो अंतर साफ दिखाई देता है। उदाहरण के तौर पर 75 kWh बैटरी क्षमता वाली इलेक्ट्रिक एसयूवी एक बार फुल चार्ज होने पर करीब 500 किलोमीटर तक चल सकती है। इसे पूरी तरह चार्ज करने में लगभग 85 यूनिट बिजली खर्च होती है। यदि औसत बिजली दर 8 रुपये प्रति यूनिट मानी जाए तो कुल खर्च करीब 680 रुपये बैठता है।
वहीं दूसरी ओर, इतनी ही दूरी तय करने के लिए पेट्रोल वाहन को लगभग 33 लीटर ईंधन की जरूरत पड़ती है। मौजूदा कीमतों के हिसाब से इस पर करीब 3300 रुपये तक खर्च हो सकते हैं। डीजल कार में यही दूरी लगभग 2500 रुपये से अधिक में पूरी होती है। यानी इलेक्ट्रिक वाहन से सफर करने पर सीधे हजारों रुपये की बचत संभव है।
लंबे समय में ज्यादा फायदा
ऑटो सेक्टर विशेषज्ञों का कहना है कि इलेक्ट्रिक कारों का सबसे बड़ा लाभ उनकी कम ऑपरेटिंग कॉस्ट है। रोजाना लंबी दूरी तय करने वाले लोगों के लिए यह विकल्प आर्थिक रूप से काफी लाभदायक साबित हो सकता है। यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन 50 से 100 किलोमीटर तक गाड़ी चलाता है, तो सालाना ईंधन खर्च में बड़ी कटौती हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार उपयोग करने वाले वाहन मालिक कुछ ही वर्षों में इलेक्ट्रिक कार की शुरुआती अतिरिक्त कीमत की भरपाई कर सकते हैं। यही वजह है कि शहरी इलाकों के साथ-साथ अब छोटे शहरों में भी इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
मेंटेनेंस खर्च भी रहता है कम
इलेक्ट्रिक गाड़ियों में पारंपरिक इंजन आधारित वाहनों की तुलना में कम मैकेनिकल पार्ट्स होते हैं। इनमें इंजन ऑयल बदलने, क्लच प्लेट रिप्लेसमेंट, गियरबॉक्स रिपेयर या फिल्टर बदलने जैसी जरूरतें काफी कम हो जाती हैं। इससे सर्विसिंग और रखरखाव का खर्च भी सीमित रहता है।
ऑटोमोबाइल बाजार से जुड़े जानकार मानते हैं कि कम मेंटेनेंस लागत इलेक्ट्रिक वाहनों को और अधिक आकर्षक बनाती है। खासकर कमर्शियल उपयोग और रोजाना लंबी दूरी तय करने वाले ग्राहकों के लिए यह एक फायदे का सौदा साबित हो सकता है।
पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर विकल्प
इलेक्ट्रिक वाहनों को केवल कम खर्च के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल तकनीक के रूप में भी देखा जा रहा है। इनमें टेल पाइप से धुआं नहीं निकलता, जिससे प्रदूषण कम करने में मदद मिलती है। यही कारण है कि सरकारें भी ईवी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं और सब्सिडी उपलब्ध करा रही हैं।
आने वाले वर्षों में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होने और बैटरी तकनीक में सुधार के साथ इलेक्ट्रिक वाहनों की लोकप्रियता और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।