लाइफ स्टाइल

SunscreenUse – क्या ज्यादा सनस्क्रीन लगाने से त्वचा को होता है नुकसान…

SunscreenUse – गर्मी के मौसम में धूप से बचाव की बात आते ही सबसे पहले सनस्क्रीन का नाम सामने आता है। त्वचा विशेषज्ञ लंबे समय से यह सलाह देते आए हैं कि बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाना जरूरी है, ताकि सूरज की हानिकारक किरणों से त्वचा को बचाया जा सके। इसके बावजूद कई लोगों के मन में यह सवाल बना रहता है कि क्या बार-बार या ज्यादा मात्रा में सनस्क्रीन लगाने से त्वचा को नुकसान हो सकता है। इस विषय पर विशेषज्ञों की राय साफ है कि सही तरीके से इस्तेमाल किया गया सनस्क्रीन त्वचा के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करता है, न कि नुकसान पहुंचाने वाला तत्व।

सनस्क्रीन के अलग-अलग प्रकार समझना जरूरी

त्वचा की देखभाल के लिहाज से यह जानना जरूरी है कि सनस्क्रीन भी अलग-अलग तरह के होते हैं। आमतौर पर बाजार में दो तरह के सनस्क्रीन उपलब्ध होते हैं—केमिकल और मिनरल। केमिकल सनस्क्रीन त्वचा में समाकर सूरज की किरणों को अवशोषित कर लेते हैं और उनके असर को कम करते हैं। वहीं, मिनरल सनस्क्रीन त्वचा की सतह पर एक परत बनाते हैं, जो किरणों को वापस परावर्तित कर देती है। जिन लोगों की त्वचा संवेदनशील होती है, उनके लिए मिनरल आधारित विकल्प ज्यादा उपयुक्त माने जाते हैं क्योंकि इनमें जलन या एलर्जी की संभावना अपेक्षाकृत कम होती है।

ज्यादा इस्तेमाल से जुड़े भ्रम की हकीकत

अक्सर यह धारणा सुनने को मिलती है कि सनस्क्रीन का अधिक उपयोग त्वचा को खराब कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरी तरह सही नहीं है। असल समस्या तब सामने आती है जब व्यक्ति अपनी त्वचा के अनुरूप उत्पाद नहीं चुनता या फिर बार-बार ऐसे उत्पाद का इस्तेमाल करता है जो उसकी त्वचा पर सूट नहीं करता। सही उत्पाद और उचित मात्रा में लगाया गया सनस्क्रीन त्वचा को सुरक्षित रखने में मदद करता है। इसलिए जरूरी है कि त्वचा के प्रकार को समझकर ही सनस्क्रीन का चयन किया जाए।

सही तरीके से उपयोग करना क्यों जरूरी

सनस्क्रीन का प्रभाव तभी नजर आता है जब इसे सही तरीके से लगाया जाए। इसे सिर्फ चेहरे तक सीमित रखने के बजाय हाथ, गर्दन और शरीर के अन्य खुले हिस्सों पर भी लगाना चाहिए। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बाहर रहने पर हर दो से तीन घंटे के अंतराल में इसे दोबारा लगाया जाए, खासकर तब जब पसीना ज्यादा आ रहा हो या पानी के संपर्क में आना पड़ रहा हो। इसके अलावा, कम से कम 30 एसपीएफ वाला सनस्क्रीन चुनना बेहतर माना जाता है ताकि पर्याप्त सुरक्षा मिल सके।

संभावित दुष्प्रभाव और सावधानियां

हालांकि ज्यादातर लोगों के लिए सनस्क्रीन सुरक्षित होता है, लेकिन कुछ मामलों में त्वचा पर हल्की प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। खासकर केमिकल सनस्क्रीन कुछ लोगों में जलन, लालिमा या रैशेज का कारण बन सकता है। ऐसी स्थिति में उत्पाद बदलना या मिनरल आधारित सनस्क्रीन अपनाना बेहतर विकल्प हो सकता है। त्वचा विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि नया उत्पाद इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करना चाहिए, ताकि किसी संभावित एलर्जी से बचा जा सके।

नियमित उपयोग से मिलती है दीर्घकालिक सुरक्षा

सनस्क्रीन केवल धूप से बचाने का साधन ही नहीं, बल्कि त्वचा को लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखने का भी एक तरीका है। नियमित उपयोग से सनबर्न, झुर्रियां और समय से पहले होने वाली त्वचा की समस्याओं से बचाव किया जा सकता है। साथ ही, यह त्वचा कैंसर के जोखिम को कम करने में भी सहायक माना जाता है। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि सही सनस्क्रीन का चुनाव और उसका नियमित इस्तेमाल त्वचा की सुरक्षा के लिए एक जरूरी कदम है।

Back to top button

Adblock Detected

Please disable your AdBlocker first, and then you can watch everything easily.