Uttarakhand: दुष्कर्म आरोपी के घर पर बुलडोजर रोकने का हाई कोर्ट का चौंकाने वाला फैसला
Uttarakhand: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने एक अहम और संवेदनशील (Sensitive) फैसला सुनाया है। सरोवरनगरी क्षेत्र में 12 साल की बच्ची से दुष्कर्म के आरोपी ठेकेदार उस्मान खान के घर पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई पर हाई कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। यह रोक अपराध की गंभीरता को नकारते हुए नहीं, बल्कि कड़ाके की ठंड और मानवीय (Humanitarian) आधार को ध्यान में रखकर दी गई है, जिसने इस पूरे मामले को नया कानूनी मोड़ दे दिया है।

सर्दी के मौसम में मानवीय राहत
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मौजूदा सर्दी के मौसम को देखते हुए आरोपी के घर को तोड़ना फिलहाल उचित नहीं होगा। अदालत का यह रुख न्याय (Justice) और संवेदना के संतुलन को दर्शाता है। कोर्ट ने मौखिक रूप से यह रोक लगाई और जिला विकास प्राधिकरण (डीडीए) को निर्देश दिए कि अगली सुनवाई तक किसी तरह की तोड़फोड़ न की जाए।
आरोपी की पत्नी की याचिका बनी आधार
इस मामले में आरोपी की पत्नी हुस्त बेगम की ओर से उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में कहा गया कि उसका पति जेल में बंद है और डीडीए ने केवल तीन दिन के भीतर घर खाली करने का आदेश दे दिया है। यह स्थिति परिवार के लिए संकट (Crisis) पैदा कर रही है, खासकर तब जब घर में महिलाएं और बच्चे रह रहे हों।
चुनिंदा कार्रवाई पर उठे सवाल
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत के सामने दलील दी कि जिस इलाके में उस्मान खान का मकान स्थित है, वहां कई अन्य मकान भी कथित तौर पर गैर-कानूनी हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि केवल एक ही घर को निशाना (Target) क्यों बनाया जा रहा है। वकील ने इसे समानता (Equality) के अधिकार से जोड़ते हुए चयनात्मक कार्रवाई बताया।
डीडीए ने रखी अपनी सख्त दलील
जिला विकास प्राधिकरण की ओर से अदालत को बताया गया कि अतिक्रमण के खिलाफ पूरी तरह विधिसम्मत (Legal) कार्रवाई की जा रही है। डीडीए ने कहा कि यह क्षेत्र वन भूमि है और आरोपी को पहले ही नोटिस जारी किया जा चुका था। उसे सुनवाई का पूरा अवसर दिया गया, लेकिन वह अपने मकान से संबंधित कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।
अपील भी हो चुकी है खारिज
डीडीए ने अदालत को यह भी बताया कि आरोपी पक्ष की अपील कमिश्नर के स्तर पर पहले ही खारिज की जा चुकी है। इसके बावजूद मानवीय पहलू (Human Aspect) को देखते हुए अदालत ने तत्काल बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगाई है। यह फैसला यह दिखाता है कि कानून केवल सख्ती नहीं, बल्कि संतुलन (Balance) भी चाहता है।
5 जनवरी तक मांगा गया जवाब
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने डीडीए को निर्देश दिया कि वह पांच जनवरी तक इस मामले में जवाबी हलफनामा दायर करे। तब तक घर को तोड़ने की कार्रवाई पर रोक जारी रहेगी। इससे साफ है कि अदालत इस मामले को पूरी गंभीरता (Seriousness) से परखना चाहती है।
अपराध की पृष्ठभूमि ने बढ़ाई संवेदनशीलता
गौरतलब है कि इसी वर्ष 30 अप्रैल को सरोवरनगरी में 12 साल की बच्ची के यौन शोषण का मामला सामने आया था। आरोप 71 वर्षीय सरकारी ठेकेदार उस्मान खान पर लगा था। आरोप है कि उसने पैसे का लालच देकर बच्ची का यौन शोषण किया। इस जघन्य (Heinous) अपराध के बाद से आरोपी न्यायिक हिरासत में है।
बुलडोजर कार्रवाई और कानून की बहस
हाल के वर्षों में बुलडोजर कार्रवाई को लेकर देशभर में बहस (Debate) तेज हुई है। कहीं इसे त्वरित न्याय का प्रतीक माना जा रहा है, तो कहीं इसे कानूनी प्रक्रिया से परे बताया जा रहा है। उत्तराखंड हाई कोर्ट का यह फैसला इसी बहस को और गहराई देता है कि अपराध और संपत्ति पर कार्रवाई को अलग-अलग देखा जाना चाहिए।
पीड़ित और आरोपी परिवार—दोनों का दर्द
जहां एक ओर पीड़ित बच्ची और उसके परिवार का दर्द असहनीय (Unbearable) है, वहीं दूसरी ओर आरोपी के परिवार के सामने बेघर होने का संकट खड़ा हो गया था। अदालत ने फिलहाल सर्दियों में बच्चों और महिलाओं को खुले आसमान के नीचे छोड़ने से बचाने को प्राथमिकता दी है।
आगे क्या होगा?
अब सभी की नजरें पांच जनवरी को दाखिल होने वाले जवाब और अगली सुनवाई पर टिकी हैं। तब यह तय होगा कि कानूनी (Judicial) प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ेगी। फिलहाल हाई कोर्ट का यह आदेश यह संदेश देता है कि कानून में सख्ती के साथ-साथ इंसानियत की भी जगह है।



