PolicyMeeting – प्रधानमंत्री मोदी ने प्रो. गोबर्धन दास से मुलाकात में सराहा योगदान
PolicyMeeting – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नीति आयोग के नव नियुक्त सदस्य प्रोफेसर गोबर्धन दास से मुलाकात की और उनके जीवन अनुभव व कार्यों की सराहना की। इस मुलाकात को नीति निर्माण के दृष्टिकोण से अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें जन स्वास्थ्य और विकास से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रो. दास का अनुभव और ज्ञान देश की नीतियों को और प्रभावी बनाने में सहायक साबित हो सकता है।

प्रधानमंत्री ने बताया प्रेरणादायक व्यक्तित्व
प्रधानमंत्री मोदी ने इस मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए कहा कि प्रो. गोबर्धन दास का जीवन संघर्ष और सेवा भावना का उदाहरण है। उन्होंने उल्लेख किया कि व्यक्तिगत चुनौतियों के बावजूद समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता लगातार मजबूत होती गई है। खासकर जन स्वास्थ्य और प्रतिरक्षा विज्ञान के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि ऐसे अनुभव नीति निर्माण को व्यावहारिक और प्रभावी बनाने में मदद करते हैं।
नीति आयोग में नई भूमिका और दृष्टिकोण
हाल ही में नीति आयोग के सदस्य बने प्रो. दास ने अपनी भूमिका को लेकर स्पष्ट दृष्टिकोण रखा है। उन्होंने राष्ट्रीय विकास और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए एक दीर्घकालिक योजना की रूपरेखा प्रस्तुत की है। इसमें वर्ष 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य पर विशेष ध्यान दिया गया है। उनका मानना है कि योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।
नियुक्ति पर जताया आभार और संकल्प
अपनी नियुक्ति के बाद प्रो. दास ने प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें देश की प्रमुख नीति संस्था में काम करने का अवसर मिला है, जो उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने यह भी कहा कि वह इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा के साथ निभाएंगे और देश के समग्र विकास के लिए काम करेंगे। उनके अनुसार, यह केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि समाज के व्यापक हित से जुड़ा अवसर है।
पश्चिम बंगाल के विकास पर विशेष ध्यान
प्रो. दास ने अपने विचारों में पश्चिम बंगाल के विकास पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र हमेशा से विचारकों और नवाचारों का केंद्र रहा है। हालांकि, उन्होंने वर्तमान चुनौतियों की ओर भी संकेत किया, खासकर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर चिंता जताई। उनका मानना है कि इन क्षेत्रों में सुधार के बिना राज्य का संतुलित विकास संभव नहीं है।
पलायन और बुनियादी सेवाओं पर चिंता
उन्होंने कहा कि राज्य से हो रहे पलायन को गंभीरता से देखने की जरूरत है, क्योंकि कई लोग बेहतर अवसरों और सुविधाओं की तलाश में बाहर जा रहे हैं। यह स्थिति संकेत देती है कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और सेवाओं को मजबूत करने की आवश्यकता है। प्रो. दास ने सुझाव दिया कि नीति आयोग के माध्यम से इन मुद्दों पर ठोस कदम उठाए जा सकते हैं, जिससे लोगों को अपने ही राज्य में बेहतर अवसर मिल सकें।
समावेशी विकास को बताया प्राथमिकता
प्रो. दास ने जोर देकर कहा कि देश के विकास की दिशा में समावेशी दृष्टिकोण जरूरी है। उन्होंने कहा कि सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की नीति ही दीर्घकालिक प्रगति सुनिश्चित कर सकती है। उनके अनुसार, विकास की योजनाओं में संतुलन और समान अवसर का ध्यान रखना आवश्यक है, ताकि देश मजबूत और आत्मनिर्भर बन सके।