झारखण्ड

Bomb Disposal – जमशेदपुर में द्वितीय विश्व युद्ध का बम निष्क्रिय, लोगों को राहत

Bomb Disposal – झारखंड के जमशेदपुर जिले के बहरागोड़ा क्षेत्र में पिछले कई दिनों से बनी दहशत आखिरकार खत्म हो गई, जब भारतीय सेना ने एक पुराने और खतरनाक बम को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय कर दिया। यह बम स्वर्णरेखा नदी के किनारे स्थित पानीपाड़ा गांव के पास मिला था, जिसके बाद पूरे इलाके में डर का माहौल बन गया था। बुधवार को सेना की कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली और धीरे-धीरे जनजीवन सामान्य होने लगा।

द्वितीय विश्व युद्ध का बम मिलने से फैली थी चिंता

जानकारी के अनुसार, नदी किनारे मिला यह बम द्वितीय विश्व युद्ध के समय का बताया जा रहा है। विशेषज्ञों ने इसे अमेरिकी निर्मित एएनएम-64 श्रेणी का बम बताया, जिसका वजन लगभग 227 किलोग्राम था। इतने भारी और संवेदनशील विस्फोटक के मिलने से इलाके में भय का माहौल बन गया था। ग्रामीणों ने सुरक्षा कारणों से खेतों और नदी के आसपास जाना बंद कर दिया था।

सावधानीपूर्वक अपनाई गई सुरक्षा प्रक्रिया

सेना की टीम ने इस अभियान को बेहद सतर्कता के साथ अंजाम दिया। बम को निष्क्रिय करने के लिए उसे करीब 10 फीट गहरे गड्ढे में रखा गया और चारों ओर बालू की बोरियों से ढक दिया गया। इसका उद्देश्य यह था कि यदि विस्फोट हो तो उसका असर सीमित रहे और आसपास किसी तरह का नुकसान न हो। इसके बाद नियंत्रित तरीके से विस्फोट कर बम को निष्क्रिय किया गया।

विशेषज्ञों की निगरानी में चला अभियान

इस पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व प्रशिक्षित अधिकारियों की निगरानी में किया गया। सेना की टीम ने वायु सेना स्टेशन के साथ समन्वय स्थापित करते हुए सुरक्षित दूरी से रिमोट प्रणाली के जरिए विस्फोट किया। धमाके की आवाज दूर-दूर तक सुनाई दी, जिससे लोगों को इस कार्रवाई का अंदाजा हुआ, लेकिन पहले से किए गए सुरक्षा इंतजामों के कारण किसी प्रकार की क्षति नहीं हुई।

ग्रामीणों में डर का माहौल अब खत्म

बम मिलने के बाद से ही आसपास के गांवों में भय का वातावरण बना हुआ था। लोग अपने दैनिक कामकाज से भी दूरी बनाए हुए थे। लेकिन जैसे ही सेना ने बम को निष्क्रिय किया, लोगों में राहत का भाव दिखाई दिया। धीरे-धीरे लोग अपने काम पर लौटने लगे हैं और स्थिति सामान्य हो रही है।

प्रशासन और सेना की सराहना

स्थानीय लोगों ने इस सफल अभियान के लिए सेना और प्रशासन की सराहना की है। उनका कहना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं होती, तो बड़ा हादसा हो सकता था। इस घटना ने यह भी दिखाया कि आपात स्थितियों में सुरक्षा एजेंसियां किस तरह समन्वय बनाकर काम करती हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि पुराने विस्फोटक कितने खतरनाक हो सकते हैं और उन्हें संभालने के लिए विशेषज्ञता और सतर्कता कितनी जरूरी होती है।

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