उत्तराखण्ड

School Management Change – देहरादून में अचानक बदलाव से अभिभावकों का विरोध

School Management Change – देहरादून के सुंदरवाला क्षेत्र में स्थित रक्षा अनुसंधान विद्यालय में प्रबंधन परिवर्तन को लेकर अभिभावकों और छात्रों में असंतोष देखने को मिला। जानकारी के अनुसार, विद्यालय का संचालन अचानक डीएवी पब्लिक स्कूल को सौंप दिया गया है, जिससे अभिभावकों में भ्रम और नाराजगी बढ़ गई है। इस फैसले की जानकारी मिलने के बाद स्कूल परिसर में विरोध के स्वर तेज हो गए और अभिभावकों ने इसे लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए।

अचानक लिए गए फैसले से बढ़ी चिंता

अभिभावकों का कहना है कि नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हो चुकी है और उन्होंने बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी सभी तैयारियां पहले ही पूरी कर ली थीं। ऐसे में बिना पूर्व सूचना के स्कूल प्रबंधन बदलने का निर्णय उनके लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा है। उनका कहना है कि इस तरह के फैसले से बच्चों की पढ़ाई पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि नए नियम और व्यवस्था को समझने में समय लगेगा।

किताबें और ड्रेस बदलने की मजबूरी

अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि उन्होंने हाल ही में बच्चों के लिए किताबें और यूनिफॉर्म खरीदी थीं, जो अब नए प्रबंधन के तहत बदलने की बात कही जा रही है। इससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। कई अभिभावकों ने इसे अनुचित बताते हुए कहा कि यदि पहले से जानकारी दी जाती, तो वे इस स्थिति के लिए तैयार रहते।

फीस संरचना में बदलाव पर आपत्ति

विद्यालय के डीएवी पब्लिक स्कूल में विलय के साथ ही फीस संरचना में भी बदलाव की चर्चा है। अभिभावकों का कहना है कि नई फीस पहले की तुलना में अधिक हो सकती है, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों पर दबाव बढ़ेगा। उन्होंने मांग की है कि फीस में किसी भी प्रकार का बदलाव पारदर्शी तरीके से और अभिभावकों से चर्चा के बाद ही किया जाना चाहिए।

छात्रों ने भी जताया विरोध

इस पूरे घटनाक्रम का असर छात्रों पर भी पड़ा है। विरोध के दौरान कुछ छात्रों ने स्कूल गेट पर लगाए गए नए बैनर और पोस्टर को हटाकर अपना असंतोष व्यक्त किया। हालांकि स्थिति को देखते हुए स्थानीय स्तर पर समझाइश देने का प्रयास भी किया गया, ताकि माहौल शांत बना रहे।

प्रबंधन से स्पष्टता की मांग

अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों से इस फैसले को लेकर स्पष्ट जानकारी देने की मांग की है। उनका कहना है कि अचानक लिए गए ऐसे निर्णयों से न केवल शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है, बल्कि अभिभावकों और छात्रों के बीच असुरक्षा की भावना भी पैदा होती है। उन्होंने आग्रह किया कि भविष्य में इस तरह के किसी भी बदलाव से पहले पर्याप्त सूचना और संवाद सुनिश्चित किया जाए।

इस पूरे मामले ने शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता और संवाद की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर कर दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन और स्कूल प्रबंधन इस स्थिति को किस तरह संभालते हैं और अभिभावकों की चिंताओं का समाधान कैसे किया जाता है।

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