CBIProbe – रिश्वत मामले में कोर्ट में पेश हुए डीजीसीए अधिकारी और कारोबारी
CBIProbe – केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने घूसखोरी के एक मामले में गिरफ्तार नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के अधिकारी मुदावत देवुला और एक निजी कंपनी से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी भरत माथुर को राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत में पेश किया। तीन दिन की सीबीआई हिरासत पूरी होने के बाद दोनों को अदालत के सामने लाया गया, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सुनवाई हुई।

ड्रोन आयात अनुमति के बदले रिश्वत का आरोप
जांच एजेंसी के अनुसार, दोनों आरोपियों पर ड्रोन आयात से जुड़ी मंजूरी दिलाने के बदले 2.5 लाख रुपये लेने का आरोप है। सीबीआई का कहना है कि यह रकम एक प्राइवेट एयरोस्पेस कंपनी के काम को आगे बढ़ाने के लिए ली गई थी। मामले की जांच के दौरान एजेंसी ने दोनों के ठिकानों पर छापेमारी भी की, जिसमें बड़ी मात्रा में नकदी और अन्य कीमती सामान बरामद हुआ।
छापेमारी में नकदी और डिजिटल सबूत मिले
सीबीआई अधिकारियों ने बताया कि तलाशी के दौरान करीब 37 लाख रुपये नकद, सोने और चांदी के सिक्के, साथ ही कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए। इन डिजिटल डिवाइस की जांच से मामले से जुड़े और साक्ष्य मिलने की संभावना जताई जा रही है। एजेंसी इन सभी जब्त वस्तुओं की फोरेंसिक जांच कर रही है, ताकि लेन-देन और संपर्कों की पूरी जानकारी सामने आ सके।
आरोपियों की भूमिका क्या रही
मुदावत देवुला डीजीसीए के एयरवर्थनेस निदेशालय में डिप्टी डायरेक्टर जनरल के पद पर तैनात थे। उनकी जिम्मेदारी विमानों और ड्रोन की उड़ान सुरक्षा से जुड़े मामलों की निगरानी करना था। वहीं, भरत माथुर एक बड़े कॉर्पोरेट समूह में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट के रूप में कार्यरत हैं और ड्रोन आयात से जुड़े व्यवसाय में सक्रिय एक एयरोस्पेस कंपनी से भी जुड़े बताए जा रहे हैं।
बिचौलिए के रूप में काम करने का आरोप
जांच एजेंसी का दावा है कि भरत माथुर ने इस पूरे मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभाई। उसने डीजीसीए अधिकारी और संबंधित निजी कंपनी के बीच संपर्क स्थापित कर रिश्वत की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। सीबीआई के अनुसार, कंपनी के कई आवेदन लंबे समय से लंबित थे, जिन पर निर्णय लेने के बदले यह लेन-देन किया गया।
रंगे हाथ गिरफ्तारी और आगे की जांच
सीबीआई ने 18 अप्रैल को कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को कथित तौर पर रिश्वत लेते समय गिरफ्तार किया था। मौके से 2.5 लाख रुपये की नकदी भी बरामद की गई। एजेंसी ने अदालत से दोनों की हिरासत बढ़ाने की मांग की है, ताकि मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की गहन जांच की जा सके।
कानूनी प्रक्रिया पर सबकी नजर
यह मामला सरकारी पद के दुरुपयोग और कॉर्पोरेट स्तर पर कथित अनियमितताओं को लेकर चर्चा में है। अब अदालत में होने वाली सुनवाई और जांच एजेंसी की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर टिकी है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े और तथ्य सामने आ सकते हैं, जिससे पूरे प्रकरण की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।