बिहार

TejashwiYadav – महिला आरक्षण पर बयान, सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

TejashwiYadav – बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर केंद्र सरकार की नीति और नीयत दोनों पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर देश में किसी भी राजनीतिक दल का विरोध नहीं है, लेकिन विधेयक में कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं की अनदेखी की गई है। उनका कहना है कि महिलाओं को आरक्षण देने की बात सही है, लेकिन इसमें सामाजिक संतुलन का ध्यान भी जरूरी है।

आरक्षण में सामाजिक आधार को शामिल करने की मांग

तेजस्वी यादव ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी महिलाओं के आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह चाहती है कि इसमें पिछड़े वर्गों की महिलाओं को भी उचित प्रतिनिधित्व मिले। उनके अनुसार, मौजूदा स्वरूप में यह सुनिश्चित नहीं हो पा रहा है कि ओबीसी वर्ग की महिलाओं को समान अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि आरक्षण का उद्देश्य सभी वर्गों तक पहुंच बनाना होना चाहिए, न कि कुछ वर्गों तक सीमित रह जाना।

जनगणना के आधार पर उठाए सवाल

उन्होंने सरकार की उस योजना पर भी सवाल उठाया जिसमें पुराने आंकड़ों के आधार पर इस विधेयक को लागू करने की बात कही जा रही है। तेजस्वी यादव ने पूछा कि जब आने वाले वर्षों में नई जनगणना होनी है, तो फिर पुराने आंकड़ों पर निर्णय क्यों लिया जा रहा है। उनका मानना है कि यदि अद्यतन और विस्तृत आंकड़े सामने आएंगे, तो नीति निर्माण अधिक संतुलित और प्रभावी हो सकेगा।

विधेयक लाने की प्रक्रिया पर भी आपत्ति

तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि सरकार को पहले से पता था कि आवश्यक समर्थन नहीं मिलेगा, इसके बावजूद विधेयक को जल्दबाजी में पेश किया गया। उन्होंने इसे राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बताते हुए कहा कि इससे वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जनता इस तरह के कदमों को समझती है और समय आने पर इसका जवाब देती है।

बिहार सरकार पर भी साधा निशाना

केंद्र के साथ-साथ उन्होंने राज्य सरकार पर भी तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री के हालिया बयानों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि नेतृत्व को अधिक काम पर ध्यान देना चाहिए, न कि केवल बयानबाजी पर। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के विकास से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट रोडमैप सामने आना चाहिए।

विकास और आर्थिक स्थिति पर उठाए सवाल

तेजस्वी यादव ने बिहार की आर्थिक और विकासात्मक स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि विभिन्न रिपोर्टों में राज्य की स्थिति चिंताजनक बताई गई है और इसे सुधारने के लिए ठोस कदमों की जरूरत है। उन्होंने सवाल किया कि राज्य कब अग्रणी राज्यों की श्रेणी में पहुंचेगा और इसके लिए सरकार की क्या योजना है।

नीतिगत फैसलों पर केंद्र के प्रभाव का आरोप

अपने बयान में उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के कई महत्वपूर्ण फैसलों में केंद्र का प्रभाव साफ नजर आता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राज्य की नीतियां स्थानीय जरूरतों के बजाय बाहरी निर्देशों के आधार पर तय हो रही हैं। उनके अनुसार, इससे राज्य के हितों पर असर पड़ सकता है।

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