HarishRawat – फल पार्टी में जुटे समर्थक, बड़े नेताओं की दूरी बरकरार
HarishRawat – उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा आयोजित फल पार्टी ने एक बार फिर पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को उजागर कर दिया। देहरादून स्थित उनके आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम में जहां बड़ी संख्या में समर्थक और कार्यकर्ता पहुंचे, वहीं पार्टी के कई प्रमुख नेता नदारद रहे। इस आयोजन को लेकर पहले से ही सियासी हलकों में चर्चा थी, क्योंकि इसे आपसी दूरी कम करने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा था।

खुले निमंत्रण के बावजूद बड़े चेहरे अनुपस्थित
हरीश रावत ने इस कार्यक्रम के लिए सभी नेताओं को आमंत्रित किया था, लेकिन प्रदेश स्तर के कई बड़े नेता इसमें शामिल नहीं हुए। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और अन्य वरिष्ठ नेता उस समय टिहरी में आयोजित एक पार्टी कार्यक्रम में मौजूद थे। ऐसे में फल पार्टी में उनकी गैरमौजूदगी ने राजनीतिक संदेशों को और भी स्पष्ट कर दिया।
अवकाश के बाद भी सक्रियता पर संशय
हाल के दिनों में हरीश रावत अपने अवकाश को लेकर भी चर्चा में रहे हैं। उन्होंने कुछ समय के लिए पार्टी गतिविधियों से दूरी बनाई थी, लेकिन अब तक उन्होंने औपचारिक रूप से वापसी की घोषणा नहीं की है। 15 दिन का अवकाश पूरा होने के बावजूद उनकी राजनीतिक सक्रियता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, जिससे पार्टी के भीतर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने बढ़ाया उत्साह
हालांकि, इस आयोजन में कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भागीदारी काफी उत्साहजनक रही। कार्यक्रम में मौसमी फलों के साथ पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों का भी इंतजाम किया गया था। उपस्थित लोगों ने तरबूज, खरबूज, ककड़ी के साथ-साथ भट्ट की चुटकानी, लाल चावल और अन्य स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लिया। इससे यह भी संदेश देने की कोशिश की गई कि यह आयोजन केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जुड़ाव का भी माध्यम है।
स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की पहल
हरीश रावत ने इस मौके पर कहा कि उनका उद्देश्य उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों और कृषि को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि पहले भी मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने राज्य के किसानों और उत्पादों को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम किया था। इस कार्यक्रम के जरिए भी उन्होंने उसी पहल को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है।
नेताओं की प्रतिक्रिया और सियासी संकेत
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पारिवारिक या आंतरिक आयोजनों में औपचारिक निमंत्रण की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि टिहरी में कार्यक्रम न होता तो वे भी इस आयोजन में शामिल होते। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों में नेताओं की अनुपस्थिति पार्टी के भीतर चल रही दूरियों को दर्शाती है।
सियासी माहौल में बढ़ी हलचल
फल पार्टी जैसे हल्के-फुल्के आयोजन के बावजूद इसके राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। एक ओर इसे कार्यकर्ताओं से जुड़ने का प्रयास बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर बड़े नेताओं की दूरी पार्टी के भीतर एकजुटता पर सवाल खड़े कर रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इन आंतरिक चुनौतियों से कैसे निपटती है।