MarathiLanguage – महाराष्ट्र में स्कूलों में मराठी अनिवार्य, सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी
MarathiLanguage – महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सभी स्कूलों में मराठी भाषा को लेकर अपने रुख को और स्पष्ट करते हुए सख्ती बढ़ा दी है। स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से जारी नए सरकारी आदेश में कहा गया है कि कक्षा 1 से 10वीं तक मराठी को अनिवार्य रूप से पढ़ाया जाना जरूरी है। यह नियम पहले ही लागू किया जा चुका था, लेकिन अब इसके पालन को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक कदम तेज किए गए हैं।

नियम लागू करने के लिए तय की गई सख्त प्रक्रिया
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जो स्कूल इस निर्देश का पालन नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ चरणबद्ध कार्रवाई की जाएगी। सबसे पहले संबंधित स्कूल को नोटिस जारी किया जाएगा, जिसके बाद प्रबंधन को 15 दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। यदि दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो स्कूल पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके साथ ही संबंधित संस्थान को अगले शैक्षणिक सत्र से मराठी विषय को अनिवार्य रूप से लागू करना होगा।
कानूनी प्रावधानों के तहत लिया गया फैसला
यह व्यवस्था ‘महाराष्ट्र अनिवार्य शिक्षण और मराठी भाषा अधिगम अधिनियम, 2020’ के तहत पहले ही लागू की जा चुकी है। विभाग का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य राज्य में मराठी भाषा के अध्ययन को बढ़ावा देना और सभी छात्रों तक इसकी पहुंच सुनिश्चित करना है। इसके बावजूद कुछ स्कूलों द्वारा नियमों की अनदेखी की शिकायतें सामने आ रही थीं, जिसके बाद यह सख्त रुख अपनाया गया है।
अपील की व्यवस्था और अंतिम कार्रवाई का प्रावधान
सरकार ने स्कूलों को राहत का विकल्प भी दिया है। यदि कोई संस्थान कार्रवाई से असहमत है, तो वह 30 दिनों के भीतर अपील कर सकता है। हालांकि, यदि अपील के बाद भी नियमों का पालन नहीं किया जाता है, तो संबंधित स्कूल की मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी स्कूल शिक्षा आयुक्त द्वारा की जाएगी, जो तीन महीने के भीतर अंतिम निर्णय लेंगे।
भाषा शिक्षण को लेकर सरकार का तर्क
शिक्षा विभाग का मानना है कि इस निर्णय से राज्य में मराठी भाषा के शिक्षण को मजबूती मिलेगी और छात्रों को स्थानीय भाषा से बेहतर जुड़ाव होगा। विभाग के अनुसार, भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं बल्कि सांस्कृतिक पहचान का भी अहम हिस्सा है, इसलिए इसे शिक्षा प्रणाली में मजबूती से लागू करना आवश्यक है।
अन्य फैसलों पर भी शुरू हुई राजनीतिक बहस
इसी बीच राज्य सरकार के एक अन्य फैसले को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। हाल ही में टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य करने का निर्णय लिया गया है। इस पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि इससे आम लोगों, खासकर छोटे कामगारों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ऐसे नियमों का इस्तेमाल आर्थिक दंड के जरिए राजस्व बढ़ाने के लिए किया जा सकता है।