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ElectionUpdate – तमिलनाडु चुनाव से पहले सियासी आरोप-प्रत्यारोप तेज

ElectionUpdate – तमिलनाडु में आगामी विधानसभा चुनाव 23 अप्रैल को होने हैं और इसके साथ ही राज्य में राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है। सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। हाल ही में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए, जिससे राजनीतिक बहस और भी तेज हो गई है।

केंद्र पर वित्तीय उपेक्षा का आरोप

पश्चिमी इरोड जिले के गोबिचेट्टीपलयम में आयोजित रैली में उदयनिधि स्टालिन ने दावा किया कि केंद्र सरकार तमिलनाडु को उसके अधिकारों के अनुसार वित्तीय सहायता नहीं दे रही है। उन्होंने विशेष रूप से शिक्षा क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य को मिलने वाली लगभग 3,000 करोड़ रुपये की राशि जारी नहीं की गई। उनके अनुसार, इससे राज्य की योजनाओं और विकास कार्यों पर असर पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र की नीतियों के कारण राज्यों के अधिकारों में लगातार कटौती हो रही है।

परिसीमन मुद्दे पर केंद्र के खिलाफ रुख

उदयनिधि स्टालिन ने परिसीमन प्रस्ताव का मुद्दा भी उठाया और कहा कि मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने सबसे पहले इस पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि इस प्रस्ताव के खिलाफ विपक्ष की एकजुटता ने अहम भूमिका निभाई और संसद में यह विधेयक पर्याप्त समर्थन न मिलने के कारण आगे नहीं बढ़ सका। उन्होंने इसे विपक्ष की बड़ी राजनीतिक उपलब्धि बताया।

एडप्पाडी सीट पर पलानीस्वामी का मजबूत दावा

दूसरी ओर, एआईएडीएमके के महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी एक बार फिर अपने गृह क्षेत्र एडप्पाडी से चुनावी मैदान में हैं। यह छठा मौका है जब वह इस सीट से किस्मत आजमा रहे हैं। इस क्षेत्र में उनका मजबूत जनाधार रहा है, जिसे उन्होंने वर्षों की राजनीतिक सक्रियता के जरिए कायम किया है।

पलानीस्वामी ने 1989, 1991, 2011, 2016 और 2021 में इस सीट से जीत दर्ज की है। कृषि आधारित इस क्षेत्र में हथकरघा उद्योग, पावर लूम और ग्रेनाइट खनन प्रमुख आजीविका के साधन हैं, और स्थानीय मुद्दों पर उनकी पकड़ को उनके समर्थन का एक बड़ा कारण माना जाता है।

त्रिकोणीय मुकाबले में दिलचस्प चुनावी समीकरण

इस बार एडप्पाडी सीट पर मुकाबला दिलचस्प माना जा रहा है। पलानीस्वामी के सामने डीएमके के उम्मीदवार सी. कासी हैं, जो पेशे से कपड़ा व्यापारी हैं और पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। इसके अलावा नाम तमिलर कच्ची की ओर से प्रियदर्शनी भी मैदान में हैं। कुल मिलाकर इस सीट पर 15 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, जिससे चुनावी प्रतिस्पर्धा और भी कड़ी हो गई है।

राजनीतिक सफर और अनुभव का प्रभाव

पलानीस्वामी का राजनीतिक अनुभव भी इस चुनाव में अहम भूमिका निभा सकता है। वह पहली बार 1989 में विधायक बने थे और बाद में 1998 में तिरुचेंगोडे से लोकसभा सदस्य भी रहे। 2017 में जे. जयललिता के निधन के बाद जब उन्होंने मुख्यमंत्री पद संभाला, तब से उनकी पहचान राज्य स्तर पर और मजबूत हुई। एडप्पाडी क्षेत्र के साथ उनका व्यक्तिगत और राजनीतिक जुड़ाव उन्हें इस सीट पर बढ़त दिलाने वाला कारक माना जा रहा है।

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