MinimumWagesUpdate – प्रदेश में मजदूरी दरों में बढ़ोतरी, नई व्यवस्था लागू
MinimumWagesUpdate – औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों के लगातार विरोध और वेतन बढ़ाने की मांग के बाद प्रदेश सरकार ने न्यूनतम मजदूरी दरों में संशोधन करते हुए नई दरें लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत एक अप्रैल 2026 से संशोधित वेतन संरचना प्रभावी हो गई है। सरकार ने इस नई व्यवस्था के तहत पूरे प्रदेश को तीन अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित कर प्रत्येक श्रेणी के लिए अलग मजदूरी दरें निर्धारित की हैं।

तीन श्रेणियों में बांटा गया प्रदेश
नई अधिसूचना के अनुसार, गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद को श्रेणी-1 में रखा गया है, जहां औद्योगिक गतिविधियां अधिक हैं। वहीं अन्य नगर निगम वाले जिलों को श्रेणी-2 में और बाकी जिलों को श्रेणी-3 में शामिल किया गया है। इस वर्गीकरण का उद्देश्य क्षेत्रीय आर्थिक परिस्थितियों और औद्योगिक विकास के स्तर के आधार पर श्रमिकों को उचित पारिश्रमिक सुनिश्चित करना है।
श्रेणी-1 में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी
गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद में काम करने वाले श्रमिकों को इस बदलाव का सबसे अधिक लाभ मिलेगा। यहां कुशल श्रमिकों का मासिक वेतन बढ़ाकर 16,868 रुपये कर दिया गया है, जो पहले 13,940 रुपये था। इसी तरह अर्द्धकुशल श्रमिकों की आय 12,445 रुपये से बढ़कर 15,059 रुपये हो गई है, जबकि अकुशल श्रमिकों का वेतन अब 13,690 रुपये प्रतिमाह तय किया गया है।
अन्य जिलों में भी संशोधित दरें लागू
प्रदेश के अन्य नगर निगम क्षेत्रों में भी मजदूरी दरों में वृद्धि की गई है। यहां कुशल श्रमिकों का वेतन करीब 16 हजार रुपये के आसपास तय किया गया है। वहीं श्रेणी-3 में आने वाले जिलों में कुशल श्रमिकों को 15,224 रुपये, अर्द्धकुशल श्रमिकों को 13,591 रुपये और अकुशल श्रमिकों को 12,356 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। इस बदलाव से राज्य के अधिकांश हिस्सों में मजदूरी में न्यूनतम स्तर पर भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी सुनिश्चित हुई है।
श्रमिकों के विरोध के बाद लिया गया फैसला
यह निर्णय उस समय लिया गया जब गौतमबुद्ध नगर समेत कई औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों ने हरियाणा के समान वेतनमान की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था, जिसकी अध्यक्षता अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार ने की।
विशेषज्ञ समिति की सिफारिश पर कार्रवाई
समिति ने विभिन्न उद्योग संगठनों, श्रमिक प्रतिनिधियों और अन्य संबंधित पक्षों से चर्चा के बाद अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी। इसी रिपोर्ट के आधार पर नई मजदूरी दरों को अंतिम रूप दिया गया। सरकार का मानना है कि इस कदम से श्रमिकों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और औद्योगिक क्षेत्रों में स्थिरता बनी रहेगी।
आगे के असर पर नजर
नई मजदूरी दरों के लागू होने के बाद अब यह देखा जाएगा कि इसका उद्योगों और श्रमिकों पर क्या प्रभाव पड़ता है। फिलहाल, इसे श्रमिकों के हित में उठाया गया एक अहम कदम माना जा रहा है, जिससे रोजगार और उत्पादन दोनों पर सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है।