IllegalMining – चंबल अभयारण्य में खनन पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
IllegalMining – सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में हो रही अवैध खनन गतिविधियों पर गंभीर चिंता जताई है। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस तरह की गतिविधियां न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही हैं, बल्कि संरक्षित वन्यजीवों के अस्तित्व के लिए भी खतरा बन रही हैं। कोर्ट ने इस मामले को गंभीर पारिस्थितिक संकट से जुड़ा बताते हुए संबंधित राज्य सरकारों को सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

अवैध खनन से संरक्षण परियोजना पर खतरा
अदालत ने कहा कि चंबल अभयारण्य में बड़े पैमाने पर हो रहा अवैध रेत खनन घड़ियाल संरक्षण परियोजना के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। न्यायालय के अनुसार, इस तरह की गतिविधियों से नदी का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हो रहा है, जिससे घड़ियाल जैसे संवेदनशील प्रजातियों के आवास पर सीधा असर पड़ रहा है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि हालात नहीं सुधरे, तो कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
राज्य सरकार को दी गई सख्त चेतावनी
सुनवाई के दौरान दो सदस्यीय पीठ ने मध्य प्रदेश सरकार को विशेष रूप से चेतावनी दी। अदालत ने कहा कि यदि अवैध खनन में शामिल लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो न्यायालय को खुद हस्तक्षेप करना पड़ेगा। इसमें अर्धसैनिक बलों की तैनाती जैसे कड़े कदम भी शामिल हो सकते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून का पालन सुनिश्चित करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।
अगली सुनवाई की तारीख तय
मामले की अगली सुनवाई 11 मई को निर्धारित की गई है। तब तक अदालत ने संबंधित पक्षों से स्थिति में सुधार और उठाए गए कदमों की जानकारी देने को कहा है। कोर्ट की इस टिप्पणी ने प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल बढ़ा दी है और अब सभी की नजर आगामी सुनवाई पर टिकी है।
चंबल अभयारण्य का भौगोलिक विस्तार
राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य वर्ष 1978 में स्थापित किया गया था और यह तीन राज्यों—राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश—में फैला हुआ है। करीब 5,400 वर्ग किलोमीटर में फैला यह क्षेत्र चंबल नदी के लगभग 400 किलोमीटर लंबे हिस्से को कवर करता है। यह इलाका अपनी साफ-सुथरी नदी और अपेक्षाकृत कम प्रदूषण के लिए जाना जाता है।
पर्यटन और प्रमुख प्रवेश क्षेत्र
अभयारण्य के मुख्य प्रवेश बिंदु राजस्थान के सवाई माधोपुर और धौलपुर, तथा उत्तर प्रदेश के आगरा और इटावा के आसपास स्थित हैं। यह क्षेत्र नाव सफारी के लिए भी लोकप्रिय है, जहां पर्यटक नदी के किनारे प्राकृतिक आवास में वन्यजीवों को देख सकते हैं। पर्यटन के लिहाज से यह इलाका स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
जैव विविधता का महत्वपूर्ण केंद्र
चंबल अभयारण्य को घड़ियाल के लिए सबसे बड़ा प्राकृतिक आवास माना जाता है और यहां दुनिया की अधिकांश जंगली घड़ियाल आबादी पाई जाती है। इसके अलावा, गंगा डॉल्फिन, मगरमच्छ, विभिन्न प्रजातियों के कछुए और 300 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां यहां मौजूद हैं। इस जैव विविधता के कारण यह क्षेत्र पर्यावरणीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जाता है।