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StartupFund – सरकार 10,000 करोड़ फंड से स्टार्टअप और EV सेक्टर को बढ़ावा

StartupFund – देश में नवाचार और उद्यमिता को नई गति देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 की घोषणा की है। करीब 10,000 करोड़ रुपये के इस कोष के जरिए शुरुआती चरण के स्टार्टअप, तकनीक आधारित कंपनियों और विनिर्माण क्षेत्र में नए प्रयोगों को वित्तीय सहायता दी जाएगी। सरकार ने इस योजना को लेकर आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है, जिससे संकेत मिलता है कि आने वाले समय में स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

निवेश को बढ़ाने के लिए नई संरचना तैयार

इस पहल के तहत सरकार अनुभवी पेशेवरों को शामिल करते हुए एक वेंचर कैपिटल निवेश समिति गठित करेगी, जो फंड के उपयोग और निवेश के फैसलों पर नजर रखेगी। उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग इस समिति के संचालन से जुड़े दिशा-निर्देश तय करेगा। इसके अलावा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निगरानी और मूल्यांकन की एक व्यवस्थित व्यवस्था भी बनाई जाएगी, ताकि निवेश का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।

सह-निवेश मॉडल से मिलेगा अतिरिक्त समर्थन

सरकार ने इस योजना में सह-निवेश का प्रावधान भी रखा है, जिसके तहत सरकारी और निजी संस्थागत निवेशक मिलकर स्टार्टअप में पूंजी लगाएंगे। इससे न केवल जोखिम कम होगा, बल्कि निवेश का दायरा भी बढ़ेगा। माना जा रहा है कि यह कदम देश में उच्च गुणवत्ता वाली नौकरियों के सृजन और औद्योगिक विकास को गति देने में मददगार साबित हो सकता है। साथ ही, भारत को वैश्विक स्तर पर नवाचार के केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने पर जोर

ऊर्जा क्षेत्र में वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए सरकार ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत तिपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए दी जाने वाली सब्सिडी की अवधि बढ़ा दी गई है। अब ई-रिक्शा और ई-कार्ट जैसे वाहनों पर मिलने वाली यह सहायता 31 मार्च 2028 तक जारी रहेगी।

दोपहिया EV के लिए भी बढ़ी समय सीमा

सरकार ने केवल तिपहिया ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के लिए भी प्रोत्साहन जारी रखने का फैसला किया है। पंजीकृत इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर सब्सिडी की अंतिम तिथि अब 31 जुलाई 2026 कर दी गई है। इससे उपभोक्ताओं को अधिक समय तक लाभ मिलेगा और इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में वृद्धि होने की उम्मीद है।

आत्मनिर्भरता और ऊर्जा सुरक्षा पर फोकस

भारी उद्योग मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, यह कदम केवल मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर नहीं उठाया गया है, बल्कि दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। सरकार का लक्ष्य है कि देश ऊर्जा के पारंपरिक स्रोतों पर निर्भरता कम करे और स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन को बढ़ावा मिले। इसके साथ ही घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन देकर आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी प्रगति की जा सके।

उद्योगों को राहत देने के लिए अतिरिक्त समय

वैश्विक आपूर्ति शृंखला में आई चुनौतियों को देखते हुए सरकार ने वाणिज्यिक वाहनों के निर्माण से जुड़े नियमों में भी कुछ राहत दी है। ट्रक और बस निर्माताओं के लिए चरणबद्ध निर्माण कार्यक्रम के दिशा-निर्देशों में छह महीने की छूट प्रदान की गई है। इससे उद्योगों को मौजूदा बाधाओं के बीच अपने उत्पादन को व्यवस्थित करने का समय मिलेगा।

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