बिज़नेस

InflationPolicy – सरकार ने अगले पांच साल के लिए बरकरार रखा 4% लक्ष्य

InflationPolicy – केंद्र सरकार ने खुदरा महंगाई को लेकर अपनी दीर्घकालिक नीति को जारी रखते हुए अगले पांच वर्षों के लिए 4 प्रतिशत का लक्ष्य बनाए रखने का फैसला किया है। यह व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से लागू होकर 31 मार्च 2031 तक प्रभावी रहेगी। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में बताया गया है कि यह निर्णय भारतीय रिजर्व बैंक के साथ विचार-विमर्श के बाद लिया गया है, जिससे मौद्रिक नीति में स्थिरता बनी रहे।

महंगाई लक्ष्य की सीमा पहले जैसी ही रहेगी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि 4 प्रतिशत का लक्ष्य मध्य बिंदु होगा, जबकि महंगाई के लिए 2 प्रतिशत से 6 प्रतिशत तक की सीमा निर्धारित रहेगी। इसका अर्थ है कि यदि महंगाई इस दायरे के भीतर रहती है, तो उसे संतुलित माना जाएगा। यह ढांचा भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम के तहत तय किया गया है और इसका उद्देश्य कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकना है।

मौद्रिक नीति समिति की भूमिका अहम रहेगी
इस फैसले के साथ भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की जिम्मेदारी भी पहले की तरह जारी रहेगी। समिति इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए ब्याज दरों पर निर्णय लेगी। इसका सीधा असर कर्ज, निवेश और बाजार की गतिविधियों पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्पष्ट लक्ष्य होने से नीति निर्धारण में पारदर्शिता बनी रहती है और आर्थिक निर्णयों में स्थिरता आती है।

इन्फ्लेशन टार्गेटिंग ढांचे की निरंतरता
भारत ने वर्ष 2016 में औपचारिक रूप से महंगाई लक्ष्य निर्धारण की प्रणाली अपनाई थी। उसी समय मौद्रिक नीति समिति का गठन किया गया था, जिसे मूल्य स्थिरता बनाए रखने की जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद से सरकार समय-समय पर इस लक्ष्य को आगे बढ़ाती रही है। मौजूदा निर्णय इस नीति की निरंतरता को दर्शाता है और यह दूसरा अवसर है जब बिना किसी बदलाव के 4 प्रतिशत का लक्ष्य कायम रखा गया है।

वर्तमान महंगाई दर लक्ष्य से नीचे
हाल के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 में खुदरा महंगाई दर 3.21 प्रतिशत रही, जो निर्धारित लक्ष्य से कम है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों दोनों में महंगाई दर अपेक्षाकृत नियंत्रित स्तर पर रही है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में कमी, विशेषकर सब्जियों के दाम घटने से महंगाई पर दबाव कम हुआ है। इससे आम उपभोक्ताओं को भी कुछ राहत मिली है।

राज्यों के बीच महंगाई में अंतर
देश के अलग-अलग राज्यों में महंगाई का स्तर एक समान नहीं है। कुछ राज्यों में यह अपेक्षाकृत अधिक दर्ज की गई है, जिनमें दक्षिण और पूर्वी भारत के कुछ राज्य शामिल हैं। यह अंतर स्थानीय मांग, आपूर्ति और अन्य आर्थिक कारकों के कारण होता है।

डेटा संग्रह की व्यापक प्रक्रिया
सरकार महंगाई के आंकड़े जुटाने के लिए देशभर के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से जानकारी एकत्र करती है। इसमें हजारों बाजारों और गांवों को शामिल किया जाता है, ताकि आंकड़े संतुलित और विश्वसनीय हों। हालिया आंकड़ों में भी व्यापक स्तर पर डेटा संग्रह किया गया है, जिससे स्थिति का सटीक आकलन संभव हो पाया है।

नीति से बाजार को मिलता है स्पष्ट संकेत
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई लक्ष्य को स्थिर बनाए रखना निवेशकों और बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। इससे आर्थिक नीतियों में निरंतरता बनी रहती है और भविष्य की योजना बनाना आसान होता है। आने वाले समय में महंगाई के नए आंकड़े और वैश्विक परिस्थितियां मौद्रिक नीति के अगले कदम तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

Related Articles

Back to top button

Adblock Detected

Please disable your AdBlocker first, and then you can watch everything easily.