ForeignPolicyDebate – पाकिस्तान की भूमिका पर कांग्रेस ने सरकार पर दागा सवाल
ForeignPolicyDebate – पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच पाकिस्तान की संभावित मध्यस्थ भूमिका को लेकर देश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की विदेश नीति की आलोचना करते हुए इसे भारत की क्षेत्रीय कूटनीति के लिए चिंताजनक स्थिति बताया है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब भारत अपनी वैश्विक भूमिका को मजबूत करने की बात करता है, पाकिस्तान का इस तरह सामने आना कई सवाल खड़े करता है।

पाकिस्तान की भूमिका पर उठाए गए सवाल
जयराम रमेश ने अपने बयान में कहा कि पाकिस्तान को मध्यस्थ के रूप में देखा जाना आश्चर्यजनक है, खासकर उसके पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय तक पाकिस्तान पर आतंकवाद को समर्थन देने, अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन और अस्थिर गतिविधियों में शामिल रहने के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में उसे किसी संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया में भूमिका मिलना गंभीर चिंता का विषय है।
विदेश मंत्री की भूमिका पर भी टिप्पणी
कांग्रेस नेता ने विदेश मंत्री एस जयशंकर के रुख पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि सरकार इस पूरे घटनाक्रम को सही ढंग से प्रस्तुत नहीं कर पा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि देश को स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि इस स्थिति में भारत की कूटनीतिक रणनीति क्या है और सरकार इसे कैसे संभाल रही है।
पूर्व और वर्तमान कूटनीति की तुलना
रमेश ने मौजूदा हालात की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल से की। उन्होंने दावा किया कि पहले भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने में सफलता हासिल की थी, लेकिन अब परिस्थितियां बदलती नजर आ रही हैं। उनके अनुसार, हाल के घटनाक्रमों ने यह संकेत दिया है कि क्षेत्रीय और वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान की सक्रियता बढ़ी है।
सर्वदलीय बैठक में सरकार का पक्ष
यह बयान उस समय सामने आया जब केंद्र सरकार ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर चर्चा के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। इस बैठक में सरकार की ओर से बताया गया कि भारत स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक संपर्क और विदेशों में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
संकट के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वह विभिन्न देशों के साथ संपर्क में है, ताकि क्षेत्रीय तनाव का असर आवश्यक आपूर्ति और सुरक्षा पर न पड़े। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि भारत अपने हितों की रक्षा करते हुए संतुलित और जिम्मेदार कूटनीतिक रुख अपनाए हुए है। इस बीच, विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों ने इस मुद्दे को राजनीतिक बहस का केंद्र बना दिया है।



