उत्तराखण्ड

CharDhamYatra – यात्रा से पहले सरकार की तैयारियां तेज, 10 लाख पंजीकरण

CharDhamYatra – उत्तराखंड में आगामी चारधाम यात्रा को लेकर सरकार ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि देश और विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को सुगम और सुरक्षित दर्शन कराना राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि अब तक करीब 10 लाख श्रद्धालु यात्रा के लिए पंजीकरण करा चुके हैं, जो इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के संकेत दे रहा है।

तैयारियों पर सरकार की विशेष नजर

मंगलवार को यात्रा की व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 19 अप्रैल से शुरू होने वाली चारधाम यात्रा के लिए सरकार पहले से ही सक्रिय है। वर्ष 2025 में कपाट बंद होने के बाद से ही अगले सीजन की तैयारी शुरू कर दी गई थी। सड़क सुधार, आधारभूत ढांचे का विकास, आवास और परिवहन सुविधाओं को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि यात्रा के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो।

बढ़ती बुकिंग से साफ संकेत

गढ़वाल मंडल विकास निगम के विश्राम गृहों में अभी तक लगभग पांच करोड़ रुपये की अग्रिम बुकिंग दर्ज की जा चुकी है। इसे देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार भी यात्रा में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंच सकते हैं। सरकार इसे ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाओं को और मजबूत करने में जुटी हुई है।

पिछले वर्ष के अनुभव से सीख

बीते वर्ष प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में प्राकृतिक आपदाओं के कारण लगभग डेढ़ महीने तक यात्रा प्रभावित रही थी। इसके बावजूद 51 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने चारधाम के दर्शन किए। इस अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस बार सरकार विशेष सतर्कता बरत रही है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके।

सुरक्षा और सुविधा पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यात्रा स्वाभाविक रूप से चुनौतीपूर्ण होती है, लेकिन श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए आपदा पूर्वानुमान प्रणाली को मजबूत किया जा रहा है और आवश्यक जानकारी समय-समय पर यात्रियों तक पहुंचाई जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि यात्रा शुरू होने से पहले वह स्वयं यात्रा मार्गों का निरीक्षण करेंगे।

संख्या नियंत्रण पर कोई नई गाइडलाइन नहीं

चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या को सीमित करने को लेकर फिलहाल कोई नया निर्णय नहीं लिया गया है। सामान्य परिस्थितियों में यात्रा को सुचारु रूप से संचालित करने पर ही सरकार का ध्यान केंद्रित है। प्रशासन का लक्ष्य है कि हर श्रद्धालु को बिना किसी परेशानी के दर्शन का अवसर मिल सके।

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