Uttarakhand Winter Weather Forecast: उत्तराखंड में आसमानी आफत नहीं बल्कि ‘खामोश सितम’ ने बढ़ाई धड़कनें, कब टूटेगा सूखे का चक्र…
Uttarakhand Winter Weather Forecast: देवभूमि उत्तराखंड में इस बार कुदरत का मिजाज कुछ बदला-बदला सा नजर आ रहा है। पहाड़ों पर जिस समय बर्फ की सफेद चादर बिछी होनी चाहिए थी, वहां आज धूल और सूखी ठंड का बसेरा है। (Rainfall and snowfall deficiency) के कारण प्रदेश की पूरी पारिस्थितिकी पर गहरा असर पड़ा है। बारिश न होने की वजह से नमी गायब है, जिससे हवा में एक अजीब सी चुभन पैदा हो गई है। यह स्थिति न केवल आम जनजीवन के लिए बल्कि किसानों और बागवानों के लिए भी किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।

सूखी ठंड ने छीना रातों का चैन
पर्वतीय इलाकों से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक, लोग इन दिनों एक ऐसी ठंड का सामना कर रहे हैं जो हड्डियों तक को कपा दे रही है। बारिश के अभाव में होने वाली यह (Dry winter conditions) सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रही है। सूखी ठंड की वजह से सांस के मरीजों और बुजुर्गों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। दिन में धूप खिली रहने के बावजूद शाम ढलते ही पारा इतनी तेजी से गिरता है कि लोगों को अलाव का सहारा लेना पड़ता है, लेकिन बिना नमी वाली यह हवा राहत के बजाय शरीर को और सुखा रही है।
कोहरे की सफेद चादर में लिपटे मैदानी जिले
मैदानी इलाकों की बात करें तो यहां स्थिति और भी अधिक गंभीर बनी हुई है। हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और देहरादून जैसे जिलों में सुबह और रात के समय (Dense fog alerts) ने यातायात की गति पर ब्रेक लगा दिया है। मौसम विज्ञान केंद्र ने चेतावनी जारी की है कि आने वाले दिनों में दृश्यता काफी कम रह सकती है। कोहरे के कारण सड़कों पर गाड़ियां रेंगने को मजबूर हैं और ट्रेनों व हवाई उड़ानों पर भी इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है, जिससे यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है।
मौसम विभाग का पीला अलर्ट और प्रशासन की सतर्कता
मौसम वैज्ञानिकों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के कई हिस्सों में येलो अलर्ट जारी किया है। विशेष रूप से नैनीताल, चंपावत और पौड़ी जैसे मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में (Severe cold wave) का प्रकोप बढ़ने की संभावना जताई गई है। प्रशासन ने लोगों को सलाह दी है कि वे बेहद जरूरी होने पर ही रात के समय सफर करें। पाले के कारण सड़कों पर फिसलन बढ़ने का खतरा भी बना रहता है, जिसके लिए लोक निर्माण विभाग को विशेष निर्देश दिए गए हैं।
धूप की तपिश और गिरते पारे का विरोधाभास
पहाड़ों में दिन के समय चटक धूप खिलने से भले ही थोड़ी राहत मिल रही हो, लेकिन यह एक छलावा मात्र है। धूप की वजह से अधिकतम तापमान तो सामान्य बना रहता है, लेकिन (Minimum temperature fluctuations) ने सबको हैरत में डाल रखा है। जैसे ही सूरज पहाड़ियों के पीछे छिपता है, तापमान शून्य के करीब पहुंचने लगता है। देहरादून में भी रिकॉर्ड किया गया कि दिन का तापमान सामान्य से ऊपर था, जबकि रात होते ही वह सामान्य से काफी नीचे लुढ़क गया, जो बदलते मौसम के खतरनाक संकेत हैं।
14 जनवरी तक राहत के कोई आसार नहीं
मौसम प्रेमियों और पर्यटकों के लिए बुरी खबर यह है कि फिलहाल बादलों के बरसने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है। मौसम विभाग के अनुसार, 14 जनवरी तक (Dry weather outlook) बना रहेगा। इसका मतलब है कि मकर संक्रांति तक प्रदेशवासियों को इसी सूखी ठंड और कोहरे के साथ जीना होगा। पश्चिमी विक्षोभ की कमजोरी के कारण पहाड़ों पर बर्फबारी का लंबा इंतजार और बढ़ गया है, जिससे पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोग भी थोड़े चिंतित नजर आ रहे हैं।
फसलों पर पाले की मार और किसानों की चिंता
खेती-किसानी के नजरिए से देखें तो यह मौसम काफी नुकसानदायक साबित हो रहा है। रात के समय पड़ने वाला पाला गेहूं और अन्य रबी की फसलों को झुलसा रहा है। (Agricultural impact of frost) के कारण पौधों की पत्तियों पर बर्फ की बारीक परत जम जाती है, जिससे फसल की वृद्धि रुक जाती है। किसान टकटकी लगाकर आसमान की ओर देख रहे हैं कि कब इंद्र देव प्रसन्न होंगे और उनकी सूखी पड़ रही फसलों को जीवनदान मिलेगा।
सेहत के प्रति बढ़ती संवेदनशीलता और सावधानी
इस बदलते मौसम में डॉक्टरों ने विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। नमी की कमी और बढ़ते प्रदूषण के कारण (Respiratory health issues) के मामले अस्पतालों में तेजी से बढ़ रहे हैं। खासकर बच्चों को इस सूखी ठंड से बचाना बेहद जरूरी है। तरल पदार्थों का सेवन और उचित गर्म कपड़ों का इस्तेमाल ही इस ‘साइलेंट विंटर’ से बचने का एकमात्र तरीका है। जब तक बारिश नहीं होती, तब तक धूल और सूखेपन से होने वाली बीमारियां पीछा नहीं छोड़ने वाली हैं।



