Uttarakhand Teacher Recruitment Reservation Dispute: आखिर किस बात का है डर, टीईटी में लाभ लेकिन नौकरी में इनकार…
Uttarakhand Teacher Recruitment Reservation Dispute: उत्तराखंड में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर विवादों के घेरे में है, जिसका मुख्य कारण आरक्षण के नियमों में स्पष्टता की कमी है। राज्य में अन्य राज्यों से शादी कर बसी अनुसूचित जाति और जनजाति की महिलाओं को (Reservation Benefits) को लेकर शिक्षा विभाग दोहरी नीति अपनाता दिख रहा है। एक तरफ जहां इन्हें शिक्षक भर्ती में आरक्षण नहीं दिया जा रहा, वहीं टीईटी की परीक्षा में इन्हें आरक्षित वर्ग का लाभ दिया जा रहा है, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है।

हाईकोर्ट का कड़ा रुख और पात्रता का संकट
माननीय उच्च न्यायालय पहले ही एक याचिका को खारिज करते हुए यह स्पष्ट कर चुका है कि अन्य राज्यों से शादी कर उत्तराखंड आई महिलाओं को यहां के कोटे का लाभ नहीं मिलेगा। इसके बावजूद, (Education Department) ने पूर्व में न केवल इन महिलाओं के आवेदन स्वीकार किए बल्कि उनका चयन भी कर लिया। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद विभाग बैकफुट पर है और चयनित होने के बावजूद ऐसी महिलाओं को नियुक्ति पत्र जारी नहीं किए गए हैं।
टीईटी के अंकों का गणित और सामान्य वर्ग की सूची
टीईटी की परीक्षा में पास होने के लिए आरक्षित वर्ग को मात्र 60 अंक लाने होते हैं, जबकि सामान्य वर्ग के लिए यह सीमा 90 अंक है। कई महिलाएं आरक्षित वर्ग में टीईटी पास कर (Teaching Jobs) के लिए आवेदन कर रही हैं। चयन प्रक्रिया के दौरान जब इन्हें आरक्षित वर्ग में सीट नहीं मिलती, तो विभाग इन्हें सामान्य वर्ग की सूची में शामिल कर देता है। वर्तमान में चल रही 1670 पदों की भर्ती में भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं।
ऑनलाइन आवेदन और काउंसलिंग की खामियां
एससीईआरटी की निदेशक बंदना गर्ब्याल ने स्वीकार किया कि टीईटी के लिए आवेदन ऑनलाइन भरे जाते हैं, जिससे प्रारंभिक स्तर पर दस्तावेजों की जांच संभव नहीं हो पाती। उनका कहना है कि (Administrative Oversight) की कमी के कारण काउंसलिंग के दौरान ही ऐसे मामलों का पता चलता है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जाति प्रमाण पत्र जारी करने से पहले स्थानीय प्रशासन को पूरी गहनता से जांच करनी चाहिए ताकि बाद में कोई कानूनी अड़चन न आए।
हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य पर लटकी तलवार
2900 पदों की पुरानी भर्ती और 1670 पदों की नई भर्ती में शामिल अभ्यर्थियों के बीच इस विसंगति को लेकर भारी असंतोष है। पात्र अभ्यर्थियों का मानना है कि (Constitutional Rights) के आधार पर आरक्षण केवल मूल निवासियों को मिलना चाहिए। नियमों के इस मकड़जाल के कारण पूरी भर्ती प्रक्रिया अधर में लटक सकती है, जिससे उत्तराखंड के स्कूलों में शिक्षकों की कमी का संकट और गहरा होने की आशंका है।



