Uttarakhand:उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में भूस्खलन ने छीन ली 22 साल के युवक की जिंदगी, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
Uttarakhand:उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में एक बार फिर प्रकृति ने अपना विकराल रूप दिखाया। अस्कोट क्षेत्र के रसगाड़ी गांव में शुक्रवार तड़के करीब चार बजे अचानक आए भारी भूस्खलन ने एक पुश्तैनी मकान को पूरी तरह मलबे में दफन कर दिया। इस हादसे में 22 साल के भुवन जोशी पुत्र ललित मोहन जोशी की नींद में ही मौत हो गई। मलबे और बड़े-बड़े पत्थरों ने मकान की दीवारें तोड़ते हुए अंदर घुसकर उन्हें दबा लिया। जब तक ग्रामीण और राहत टीम पहुंची, बहुत देर हो चुकी थी।

घटना कैसे हुई और क्या था मौसम का मिजाज
पिथौरागढ़ जिले के दूरस्थ इलाके अस्कोट के रसगाड़ी में स्थित ओजपाली तोक में बीती रात से बारिश का दौर जारी था। पहाड़ी पर लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण मिट्टी ढीली पड़ गई थी। तड़के करीब चार बजे ऊपर से भारी मात्रा में मलबा, बोल्डर और पत्थर खिसककर नीचे बने ललित मोहन जोशी के मकान पर जा गिरा। देखते ही देखते पूरा मकान मलबे के ढेर में तब्दील हो गया। घर में मौजूद परिजन किसी तरह बाहर निकल आए, लेकिन भुवन जोशी कमरे में गहरी नींद में थे। मलबे की भारी मात्रा के कारण तत्काल उन्हें बचाना संभव नहीं हो सका।
ग्रामीणों और राहत टीम की मुश्किल भरी कोशिश
सुबह जैसे ही ग्रामीणों को घटना का पता चला, उन्होंने तुरंत राजस्व विभाग और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची राजस्व उप निरीक्षक और पुलिस की टीम ने जेसीबी की मदद से कई घंटों तक मलबा हटाने का प्रयास किया। लेकिन मलबे की भारी मात्रा और लगातार खतरा बने रहने के कारण काम में काफी दिक्कत आई। आखिरकार दोपहर तक भुवन जोशी का शव मलबे से बाहर निकाला गया। चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है।
परिवार पर बिजली बनकर गिरी दुखद खबर
भुवन जोशी परिवार में सबसे छोटे थे और हाल ही में उन्होंने 12वीं की परीक्षा पास की थी। आगे की पढ़ाई और नौकरी के सपने संजोए हुए थे। अचानक हुई इस घटना से माता-पिता और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। ग्रामीणों ने बताया कि भुवन बहुत मेहनती और मिलनसार स्वभाव के थे। गांव के युवाओं में वे काफी लोकप्रिय थे।
प्रशासन ने दी तत्काल राहत, मुआवजा राशि स्वीकृत
मौके पर पहुंची तहसीलदार पिंकी आर्या ने परिजनों से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना दी। उन्होंने बताया कि आपदा राहत मानकों के अनुसार मृतक के परिजनों को तत्काल राहत राशि प्रदान की गई है। साथ ही पूरी आर्थिक सहायता और अन्य जरूरी मदद उपलब्ध कराई जा रही है। स्थानीय प्रशासन ने क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के मद्देनजर अन्य संवेदनशील जगहों पर भी निगरानी बढ़ा दी है।
पहाड़ों में बढ़ते भूस्खलन का खतरा क्यों
उत्तराखंड में मानसून के दौरान हर साल सैकड़ों जगहों पर भूस्खलन की घटनाएं सामने आती हैं। अनियोजित कटिंग, जंगलों की कटाई, भारी बारिश और जलवायु परिवर्तन के कारण पहाड़ लगातार कमजोर हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना वैज्ञानिक अध्ययन के सड़क निर्माण और बस्तियों का विस्तार इस खतरे को और बढ़ा रहा है। पिथौरागढ़, चम्पावत, अल्मोड़ा जैसे सीमावर्ती जिलों में यह समस्या साल दर साल गंभीर होती जा रही है।
हर साल ऐसी घटनाएं हमें याद दिलाती हैं कि प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। भुवन जोशी की असमय मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कब तक हम ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएंगे?


