TrekkingBusiness – वैश्विक तनाव के बीच पर्वतारोहण कारोबार पर पड़ा असर
TrekkingBusiness – अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव का असर अब पर्यटन और पर्वतारोहण क्षेत्र में भी दिखाई देने लगा है। उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में ट्रेकिंग और पर्वतारोहण से जुड़े व्यवसायियों का कहना है कि इस वर्ष विदेशी पर्यटकों की बुकिंग लगभग ठप हो गई है। आमतौर पर मार्च तक विदेशी समूहों की भारी संख्या में बुकिंग हो जाती थी, लेकिन इस बार हालात बिल्कुल अलग हैं।

विदेशी बुकिंग में आई बड़ी गिरावट
गढ़वाल माउंटेनियरिंग ट्रेकिंग एसोसिएशन से जुड़े लोगों के अनुसार हर साल इस समय तक विदेशों से बड़ी संख्या में ट्रेकिंग ग्रुप अपनी बुकिंग पक्की कर लेते थे। खासतौर पर इस्राइल, अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों से पर्यटक यहां आते थे। हालांकि इस बार न केवल नई बुकिंग नहीं हुई है, बल्कि पहले से की गई बुकिंग भी अस्थायी रूप से रोक दी गई हैं। कारोबारियों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर अस्थिर माहौल के कारण लोग यात्रा योजनाओं को टाल रहे हैं।
स्थानीय कारोबारियों की चिंता बढ़ी
इस क्षेत्र से जुड़े व्यवसायियों के लिए यह स्थिति चिंता का कारण बन गई है। उनका कहना है कि विदेशी पर्यटकों के आने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के कई अवसर पैदा होते हैं। गाइड, पोर्टर, होटल और ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोग सीधे तौर पर इस पर निर्भर रहते हैं। जब विदेशी पर्यटक नहीं आते, तो इसका सीधा असर पूरे स्थानीय अर्थतंत्र पर पड़ता है।
हर साल हजारों विदेशी पर्यटक आते थे
एसोसिएशन के अध्यक्ष जयेंद्र राणा के अनुसार हर वर्ष जिले में करीब दस हजार से अधिक विदेशी पर्यटक पर्वतारोहण और ट्रेकिंग के लिए पहुंचते थे। उनके आने से देश के अन्य राज्यों से भी ट्रैकर्स और पर्वतारोही आकर्षित होते थे। इस तरह यह क्षेत्र पर्यटन गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका था, लेकिन इस बार स्थिति सामान्य नहीं दिख रही है।
नई सीजन से थीं उम्मीदें, लेकिन हालात बदल गए
व्यवसायियों को उम्मीद थी कि इस साल अप्रैल से शुरू होने वाले ट्रेकिंग सीजन में अच्छी गतिविधियां देखने को मिलेंगी। प्रशासन की ओर से भी पर्वतारोहण गतिविधियों को शुरू करने की तैयारी की जा रही थी। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव ने इन उम्मीदों पर असर डाल दिया है। इससे आने वाले महीनों में कारोबार की स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
पर्यटन उद्योग पर व्यापक असर की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात जल्द सामान्य नहीं होते हैं, तो इसका असर केवल ट्रेकिंग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे पर्यटन उद्योग पर पड़ सकता है। ऐसे में स्थानीय व्यवसायियों को वैकल्पिक उपायों और घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में भी सोचना पड़ सकता है, ताकि नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सके।



