Siddhabali Temple Dispute Kotdwar: देवभूमि की मर्यादा हुई शर्मसार, आस्था के केंद्र सिद्धबली मंदिर में श्रद्धालुओं पर बरसे लाठी और पत्थर
Siddhabali Temple Dispute Kotdwar: उत्तराखंड के कोटद्वार में स्थित सुप्रसिद्ध श्री सिद्धबली मंदिर में नए साल के मौके पर एक ऐसी हृदयविदारक घटना घटी जिसने मानवता और भक्ति दोनों को झकझोर कर रख दिया। मुजफ्फरनगर से आए श्रद्धालुओं और मंदिर की (Religious Tourism Safety) व्यवस्था संभालने वाले स्वयंसेवकों के बीच मामूली बात पर शुरू हुआ विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। पवित्र मंदिर परिसर अचानक युद्ध के मैदान में तब्दील हो गया जहाँ शांति की जगह चीख-पुकार और गुस्से ने ले ली।

मन्नत पूरी करने आए परिवार पर टूटा कहर
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर स्थित रामलीला टीला से श्रद्धालुओं का एक जत्था बड़ी उम्मीदों के साथ बाबा सिद्धबली के दर्शन करने पहुँचा था। नववर्ष 2026 के पहले दिन अपनी मन्नत पूरी होने पर प्रसाद चढ़ाने आए इन (Pilgrimage Experience India) भक्तों को जरा भी अंदाजा नहीं था कि उनकी यह यात्रा चोटों और आंसुओं के साथ समाप्त होगी। मंदिर की गरिमा उस वक्त तार-तार हो गई जब श्रद्धा और सेवा के बीच अहंकार की दीवार खड़ी हो गई।
एक दूधमुंहे बच्चे और मां की बेबसी
भीड़ का दबाव और एक नन्हा सा बच्चा गोद में होने के कारण मुजफ्फरनगर की एक महिला श्रद्धालु ने मन्नत का धागा खोलने के लिए एक छोटे रास्ते का सहारा लेना चाहा। जैसे ही उन्होंने उस अस्थायी रूप से (Crowd Management Issues) बंद मार्ग से जाने का प्रयास किया, वहां तैनात स्वयंसेवकों ने उन्हें रोक दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिला की मजबूरी समझने के बजाय स्वयंसेवकों का व्यवहार बेहद रुखा और अमर्यादित था, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।
जब मर्यादा भूल बैठे मंदिर के पहरेदार
आरोप है कि बातचीत के दौरान स्वयंसेवक अपनी शालीनता पूरी तरह भूल गए और देखते ही देखते बहस हाथापाई में बदल गई। मंदिर परिसर के भीतर ही (Voluntary Service Ethics) व्यवस्था बनाने वाले लोग खुद अव्यवस्था का कारण बन गए और श्रद्धालुओं पर लात-घूसे बरसाने शुरू कर दिए। आस्था के इस पावन धाम पर मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ दी गईं, जिससे वहां मौजूद अन्य भक्त भी सहम गए।
लाठी और पत्थरों से हुआ खूनी हमला
यह झड़प केवल धक्का-मुक्की तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें लाठियों और पत्थरों का भी जमकर प्रयोग किया गया। कुछ ही मिनटों के भीतर मंदिर परिसर (Conflict Resolution at Shrines) में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। इस हमले में मुजफ्फरनगर से आए गौरव और कार्तिक समेत तीन श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हो गए। खून से लथपथ श्रद्धालुओं को देखकर मंदिर आए अन्य दर्शनार्थी भी सन्न रह गए और दहशत का माहौल व्याप्त हो गया।
पुलिस की मशक्कत और बेबस सुरक्षा व्यवस्था
मंदिर में ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने अपनी पूरी ताकत लगाकर दोनों पक्षों को अलग करने की कोशिश की, लेकिन आक्रोश इतना तीव्र था कि उसे शांत करना मुश्किल हो गया। सुरक्षा घेरे के (Public Order Maintenance) बावजूद हुई इस मारपीट ने मंदिर प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। घायल पक्ष ने तुरंत कोटद्वार कोतवाली पुलिस को तहरीर देकर दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की गुहार लगाई है।
मंदिर समिति के रुख पर उठते गंभीर सवाल
इतनी बड़ी हिंसक घटना होने के बावजूद मंदिर समिति का रवैया काफी चौंकाने वाला रहा है। जहाँ घायल श्रद्धालु न्याय की मांग कर रहे हैं, वहीं (Temple Management Accountability) समिति के अध्यक्ष डॉ. जेपी ध्यानी ने इस घटना को एक मामूली विवाद बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की। समिति का कहना है कि बीच-बचाव के बाद मामला शांत हो गया था, लेकिन घायलों की स्थिति और सीसीटीवी फुटेज कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।
देवभूमि की छवि पर गहरा आघात
सिद्धबली बाबा का मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है, लेकिन इस तरह की घटनाओं से देवभूमि की अतिथि देवो भवः की परंपरा को गहरी चोट पहुँचती है। श्रद्धालुओं के साथ (Devbhoomi Hospitality Standards) ऐसा व्यवहार न केवल निंदनीय है बल्कि पर्यटन और धार्मिक आस्था के लिहाज से भी चिंताजनक है। अब देखना यह होगा कि पुलिस इस मामले में क्या कदम उठाती है और क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाएगा।



