ReligiousConversion – हरिद्वार में मुस्लिम परिवार ने स्वेच्छा से अपनाया सनातन धर्म
ReligiousConversion – धर्मनगरी हरिद्वार में मंगलवार को एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया, जिसने स्थानीय लोगों और संत समाज का ध्यान आकर्षित किया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आए एक मुस्लिम परिवार ने अपनी इच्छा से सनातन धर्म को अपनाया। परिवार के मुखिया मोहम्मद शहजाद ने अपना नाम बदलकर शंकर रखा, जबकि उनकी पत्नी रजिया अब सावित्री के नाम से जानी जाएंगी। इस प्रक्रिया में उनके तीनों बच्चों सहित कुल पांच सदस्यों ने भाग लिया और पारंपरिक विधियों के साथ नई आस्था को स्वीकार किया।

वैदिक विधियों के साथ संपन्न हुआ धार्मिक अनुष्ठान
यह पूरा आयोजन हरिद्वार के चंडीघाट स्थित ब्रह्मकुंड क्षेत्र में किया गया। संतों और आचार्यों की उपस्थिति में सबसे पहले परिवार ने गंगा स्नान किया। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ आयोजित किया गया, जिसे शुद्धिकरण प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया। धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए पूरे अनुष्ठान को क्रमबद्ध तरीके से संपन्न कराया गया, जिसमें परिवार ने पूरी श्रद्धा के साथ भाग लिया।
यज्ञोपवीत और नामकरण संस्कार की प्रक्रिया
धार्मिक अनुष्ठान के अगले चरण में परिवार के सदस्यों को यज्ञोपवीत धारण कराया गया। इसके बाद पारंपरिक नामकरण संस्कार किया गया, जिसमें सभी सदस्यों के नए नाम घोषित किए गए। मोहम्मद शहजाद को शंकर, उनकी पत्नी रजिया को सावित्री, बड़ी बेटी को रुक्मणी, छोटी बेटी को दीक्षा और बेटे को रुद्र नाम दिया गया। इस दौरान परिवार ने सनातन परंपराओं और जीवन मूल्यों को अपनाने का संकल्प भी लिया।
संत समाज की मौजूदगी और समर्थन
इस कार्यक्रम में कई प्रमुख संत और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। आयोजन गौरी शंकर मंदिर गौशाला परिसर में संत राम विशाल दास महाराज के सान्निध्य में हुआ, जबकि अरुण कृष्ण महाराज के मार्गदर्शन में वैदिक प्रक्रिया पूरी कराई गई। आचार्य कुलदीप विद्यार्थी और अनुज शास्त्री ने अनुष्ठान का संचालन किया। इस मौके पर अखिल भारतीय संत आश्रम परिषद से जुड़े संतों और अन्य गणमान्य लोगों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
परिवार ने स्वेच्छा से लिया निर्णय
कार्यक्रम के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि परिवार ने यह निर्णय अपनी इच्छा से लिया है। किसी प्रकार के दबाव या प्रलोभन की बात सामने नहीं आई। धार्मिक प्रक्रिया के बाद संत समाज की ओर से परिवार का स्वागत किया गया और उन्हें नई जीवनशैली के प्रति मार्गदर्शन भी दिया गया। आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ और स्थानीय प्रशासन की ओर से भी स्थिति पर नजर रखी गई।
हरिद्वार में इस तरह की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं, जहां लोग अपनी व्यक्तिगत आस्था के आधार पर धार्मिक निर्णय लेते हैं। इस मामले में भी प्रक्रिया पूरी तरह धार्मिक परंपराओं के अनुरूप और सार्वजनिक रूप से संपन्न हुई।