उत्तराखण्ड

LPGCrisis – गैस की कमी से ढाबों पर महंगी हुई रोटी

LPGCrisis – घरेलू गैस सिलेंडर की कमी का असर अब आम लोगों के रोजमर्रा के खर्च पर साफ दिखाई देने लगा है। खासतौर पर छोटे ढाबों और ठेलियों पर मिलने वाली रोटी की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी ने लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। जो रोटी कुछ समय पहले तक सात या आठ रुपये में मिल जाती थी, अब उसके लिए 12 से 15 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं। यह बदलाव उन लोगों के लिए ज्यादा चिंता का विषय बन गया है, जो रोजाना सस्ते खाने पर निर्भर रहते हैं।

गैस महंगी और आपूर्ति बाधित, बढ़ी परेशानी
ढाबा और ठेला संचालकों का कहना है कि कीमत बढ़ाना उनकी मजबूरी बन गई है। उनका कहना है कि गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ-साथ इसकी उपलब्धता भी एक बड़ी समस्या बन चुकी है। कई इलाकों में सिलेंडर समय पर नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे रोज का काम प्रभावित हो रहा है। पटेल नगर जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले विक्रेताओं ने बताया कि गैस की बुकिंग करने के बाद भी समय पर डिलीवरी नहीं हो रही है।

एजेंसियों पर भी नहीं मिल रहा पर्याप्त स्टॉक
स्थिति केवल ग्राहकों तक सीमित नहीं है, बल्कि गैस एजेंसियों के पास भी पर्याप्त सिलेंडर उपलब्ध नहीं हैं। इसका सीधा असर छोटे कारोबारियों पर पड़ रहा है, जो अपने व्यवसाय के लिए पूरी तरह गैस पर निर्भर हैं। जब समय पर सिलेंडर नहीं मिलता, तो उन्हें वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ता है, जो अधिक खर्चीले और समय लेने वाले होते हैं।

चूल्हे पर लौटने को मजबूर छोटे व्यापारी
कई ढाबा संचालक अब गैस की जगह पारंपरिक चूल्हे का उपयोग करने लगे हैं। हालांकि यह विकल्प स्थायी समाधान नहीं है, क्योंकि इसमें मेहनत और लागत दोनों अधिक लगती हैं। लकड़ी या कोयले से खाना बनाने में समय भी ज्यादा लगता है, जिससे ग्राहकों को सेवा देने में देरी होती है। इस पूरी प्रक्रिया का असर अंततः खाने की कीमतों पर पड़ रहा है।

एक सप्ताह से सिलेंडर का इंतजार
राजपुर रोड पर ढाबा चलाने वाले राजेंद्र ने बताया कि उनका गैस सिलेंडर खत्म हुए एक हफ्ता हो चुका है, लेकिन अभी तक नया सिलेंडर नहीं मिल पाया है। इस वजह से उन्हें मजबूरी में चूल्हे पर खाना बनाना पड़ रहा है। वहीं कारगी क्षेत्र में ठेला लगाने वाले महेंद्र का कहना है कि बढ़ती लागत के कारण उन्हें रोटी के दाम करीब तीन रुपये तक बढ़ाने पड़े हैं।

आम लोगों की जेब पर बढ़ा बोझ
इस पूरी स्थिति का असर सीधे तौर पर आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। जो लोग कम कीमत में भरपेट खाना खाने के लिए ढाबों और ठेलियों का सहारा लेते थे, अब उन्हें ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। गैस संकट ने न सिर्फ छोटे कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ाई हैं, बल्कि आम जनता के बजट को भी प्रभावित किया है।

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