उत्तराखण्ड

LeopardAttack – कोटद्वार में घर से बच्चे को उठाकर ले गया गुलदार

LeopardAttack – उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार क्षेत्र में मानव और वन्यजीव के बीच टकराव का एक चिंताजनक मामला सामने आया है। पोखड़ा रेंज के अंतर्गत आने वाले धस्माणी गांव में एक गुलदार ने घर के पास खेल रहे एक बच्चे पर हमला कर दिया। इस घटना ने स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है और वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

घर के पास खेलते समय हुआ हमला

जानकारी के अनुसार, 11 वर्षीय दीपक सिंह अपने घर के आसपास मौजूद था, तभी अचानक गुलदार वहां पहुंच गया। देखते ही देखते उसने बच्चे को दबोच लिया और करीब 20 से 25 मीटर दूर तक घसीट ले गया। यह घटना इतनी तेजी से हुई कि आसपास मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। बच्चे की चीख-पुकार सुनकर परिजन और ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे।

परिजनों के शोर से बची जान

घटना के दौरान परिवार और आसपास के लोगों ने जोर-जोर से शोर मचाया, जिसके बाद गुलदार बच्चे को छोड़कर जंगल की ओर भाग गया। हालांकि तब तक बच्चा गंभीर रूप से घायल हो चुका था। ग्रामीणों ने तत्काल उसे उठाकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नौगांवखाल पहुंचाया, जहां उसका प्राथमिक उपचार किया गया।

इलाज के लिए किया गया रेफर

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के बाद डॉक्टरों ने बच्चे की स्थिति को देखते हुए उसे जिला अस्पताल पौड़ी रेफर कर दिया। वहां से भी बेहतर इलाज के लिए उसे हायर सेंटर भेजा गया है। चिकित्सकों के अनुसार, बच्चे को शरीर पर कई जगह चोटें आई हैं और उसका उपचार जारी है।

क्षेत्र में बढ़ी दहशत

इस घटना के बाद गांव और आसपास के इलाकों में डर का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ समय से गुलदार की गतिविधियां बढ़ गई हैं और वह आबादी वाले क्षेत्रों के करीब देखा जा रहा है। लोगों ने वन विभाग से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

वन विभाग पर बढ़ा दबाव

स्थानीय लोगों ने वन विभाग से गश्त बढ़ाने और गुलदार को पकड़ने की मांग की है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जानकारी मिलते ही टीम को मौके पर भेजा गया है और इलाके में निगरानी बढ़ा दी गई है। साथ ही लोगों को सतर्क रहने और बच्चों को अकेले बाहर न जाने देने की सलाह दी गई है।

लगातार बढ़ रही ऐसी घटनाएं

पर्वतीय क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों के दायरे में कमी और खाद्य स्रोतों की कमी के कारण जंगली जानवर आबादी वाले इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे में दीर्घकालिक समाधान के लिए ठोस रणनीति की आवश्यकता बताई जा रही है।

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