उत्तराखण्ड

LawAndOrder – देहरादून में बढ़ते अपराध पर सियासी घमासान

LawAndOrder – प्रदेश में हाल के दिनों में बढ़ती आपराधिक घटनाओं ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। कानून व्यवस्था को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस मुख्यालय तक मार्च किया। प्रदर्शन के दौरान पार्टी नेताओं ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि राज्य में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं, जबकि आम जनता खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है। राजधानी देहरादून में लगातार हुई वारदातों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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प्रदर्शन के दौरान नेताओं का तीखा हमला

सुभाष रोड पर लगे बैरिकेड्स तक पहुंचे कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारेबाजी की। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, चकराता विधायक प्रीतम सिंह और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत समेत कई वरिष्ठ नेता मौके पर मौजूद रहे। नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश में अपराध की घटनाएं एक के बाद एक सामने आ रही हैं, लेकिन पुलिस की कार्रवाई असरदार नहीं दिख रही। उनका कहना था कि राजधानी जैसे संवेदनशील शहर में दिनदहाड़े हत्याएं होना गंभीर चिंता का विषय है।

लगातार हत्याओं से दहशत का माहौल

हाल के दिनों में गुंजन हत्याकांड, अर्जुन हत्याकांड और अब विक्रम शर्मा की हत्या ने लोगों को झकझोर दिया है। शुक्रवार सुबह करीब दस बजे राजपुर रोड जैसे पॉश इलाके में हुई गोलीबारी की घटना ने शहर की शांति को तोड़ दिया। यह बीते ग्यारह दिनों में दिन के समय हुई तीसरी हत्या बताई जा रही है। इन घटनाओं के बाद शहर में भय का माहौल साफ देखा जा सकता है। स्थानीय लोग सवाल कर रहे हैं कि आखिर शांत माने जाने वाले देहरादून में अपराधी इस तरह बेखौफ कैसे घूम रहे हैं।

जनता के बीच बढ़ती चिंता

घटना की खबर फैलते ही शहरभर में चर्चा का विषय कानून व्यवस्था बन गया। बाजारों, कार्यालयों और आवासीय इलाकों में लोगों के बीच एक ही सवाल गूंजता रहा कि आखिर प्रशासन की पकड़ ढीली क्यों पड़ रही है। कई नागरिकों का कहना है कि लगातार हो रही वारदातों से भरोसा कमजोर हो रहा है। उनका मानना है कि अपराध पर अंकुश लगाने के लिए सख्त और त्वरित कदम उठाने की जरूरत है, ताकि लोगों में सुरक्षा का एहसास लौट सके।

प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल

देहरादून में 48 घंटे के भीतर दो हत्याओं के बाद पुलिस महकमे में अहम बदलाव किए गए हैं। एसएसपी अजय सिंह को उनके पद से हटाकर एसटीएफ की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी जगह हरिद्वार के एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल को देहरादून की कमान दी गई है। वहीं एसटीएफ के एसएसपी नवनीत सिंह को हरिद्वार भेजा गया है। इसके अलावा ऊधमसिंह नगर और चंपावत जिलों में भी अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। प्रशासनिक हलकों में इसे स्थिति को संभालने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

सरकार पर जवाबदेही का दबाव

विपक्ष का कहना है कि केवल अधिकारियों के तबादले से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनका तर्क है कि अपराध की जड़ों तक पहुंचकर ठोस रणनीति बनानी होगी। दूसरी ओर सरकार की ओर से अभी तक औपचारिक प्रतिक्रिया सीमित रही है, लेकिन पुलिस अधिकारियों का दावा है कि मामलों की गहन जांच की जा रही है और दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। अब सबकी नजर इस बात पर है कि नए नेतृत्व में पुलिस व्यवस्था कितनी तेजी से हालात को नियंत्रित कर पाती है।

आगे की राह पर निगाहें

देहरादून लंबे समय से शांत और व्यवस्थित शहर के रूप में पहचाना जाता रहा है। ऐसे में हालिया घटनाओं ने उसकी छवि को प्रभावित किया है। कानून व्यवस्था की बहाली और नागरिकों का भरोसा कायम रखना प्रशासन की प्राथमिकता होगी। आने वाले दिनों में पुलिस की कार्रवाई और जांच की प्रगति तय करेगी कि हालात किस दिशा में जाते हैं। फिलहाल, प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बहस तेज है और आम जनता ठोस कदमों की उम्मीद कर रही है।

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