उत्तराखण्ड

Himalaya Cleaning Mission Uttarakhand: सात समंदर पार से आए हिमालय की ‘रक्षक’, अब होगी सफाई…

Himalaya Cleaning Mission Uttarakhand: स्पेन की रहने वाली जेमा कोलेल जब योग और शांति की तलाश में उत्तराखंड आईं, तो उन्होंने हिमालय की खूबसूरती के पीछे छिपे एक कड़वे सच को देखा। पहाड़ों की ऊंची चोटियों और (Environmental Degradation) के बढ़ते संकट को देख उनका दिल पसीज गया। ऋषिकेश में योग सीखने के बाद जब वे चमोली पहुंचीं, तो उन्हें हर तरफ प्लास्टिक का कचरा बिखरा मिला। इसके बाद उन्होंने तय किया कि वे केवल एक पर्यटक बनकर नहीं, बल्कि एक रक्षक बनकर यहां रहेंगी।

Himalaya Cleaning Mission Uttarakhand
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पीठ पर कचरे का बोझ और अटूट संकल्प

30 वर्षीय जेमा कोलेल पेशे से एक ग्राफिक डिजाइनर हैं, लेकिन आज उनकी पहचान हिमालय की सफाई करने वाली वीरांगना के रूप में है। पिछले दो वर्षों से वे स्थानीय पर्वतारोही मनोज राणा के साथ मिलकर (Waste Management) का कठिन कार्य कर रही हैं। वे अब तक 300 किलो से अधिक प्लास्टिक कचरा अपनी पीठ पर ढोकर दुर्गम रास्तों से नीचे सड़क तक ला चुकी हैं। उनकी यह निस्वार्थ सेवा स्थानीय लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।

तस्वीरों में सिमटते हिमालय की मार्मिक चेतावनी

जेमा का मानना है कि अगर हम अभी नहीं संभले, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए हिमालय केवल किताबों और तस्वीरों तक सीमित रह जाएगा। वे कहती हैं कि (Global Warming) के इस दौर में पहाड़ों पर फेंका गया कचरा पर्यावरण के लिए जहर के समान है। जेमा को इस बात पर आश्चर्य होता है कि लोग जिसे देवभूमि मानकर पूजते हैं, उसे ही गंदा कैसे कर सकते हैं। उनका संदेश स्पष्ट है कि पहाड़ों की पवित्रता बचाना सबकी जिम्मेदारी है।

स्पेनिश संस्कृति और व्यक्तिगत जिम्मेदारी का पाठ

जेमा बताती हैं कि स्पेन में लोग अपना कचरा खुद अपने साथ वापस लाने की आदत रखते हैं। वे उत्तराखंड में भी इसी (Civic Responsibility) को बढ़ावा देना चाहती हैं। उनका कहना है कि सफाई अभियानों के दौरान सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि जिस जगह को वे साफ करती हैं, वहां कुछ ही दिनों बाद लोग दोबारा कूड़ा फैला देते हैं। इसके लिए वे अब लोगों की मानसिकता बदलने पर जोर दे रही हैं।

‘द 108 पीक’ के माध्यम से जागरूकता की मशाल

जेमा और मनोज ने ‘द 108 पीक क्लीन माउंटेन सेफ माउंटेन’ नाम से एक समूह बनाया है। इस समूह के माध्यम से वे न केवल सफाई कर रहे हैं, बल्कि स्कूलों और गांवों में जाकर (Awareness Campaign) भी चला रहे हैं। उन्होंने लॉर्ड कर्जन ट्रैक, औली और वेदनी बुग्याल जैसे कठिन क्षेत्रों को कचरा मुक्त किया है। 7000 मीटर से ऊंचे त्रिशूल और मुकुट पर्वत को पार करने वाली जेमा अब हिमालय को प्लास्टिक मुक्त बनाने के मिशन पर हैं।

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