उत्तराखण्ड

HaridwarFiringCase – भाजपा नेता पर हमले के मामले में तीन आरोपी गिरफ्तार

HaridwarFiringCase – हरिद्वार के कनखल थाना क्षेत्र में हुए गोलीकांड और हमले के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश मंत्री तरुण चौहान भी आरोपियों में शामिल हैं। पुलिस ने उन्हें और दो अन्य लोगों को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से हिरासत में लिया। गिरफ्तारी के बाद तीनों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इस घटना के पीछे जमीन से जुड़ा विवाद बताया जा रहा है, जिसने दो स्थानीय गुटों के बीच तनाव को हिंसक रूप दे दिया।

जमीन विवाद से शुरू हुआ था विवाद

पुलिस के अनुसार यह घटना 28 जनवरी को हरिद्वार के पंजनहेड़ी इलाके में हुई थी। उस दिन जमीन को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया और देखते ही देखते झड़प हिंसक हो गई। इस दौरान जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित चौहान पर हमला किया गया। घटना में उनके भाई सतीश चौहान को गोली लगने से चोट आई थी। इसके बाद मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई गई और आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया।

पुलिस ने इस प्रकरण में अतुल चौहान, तरुण चौहान, गौरव चौहान और अभिषेक चौहान उर्फ सिम्मी को आरोपी बनाया था। चारों के खिलाफ कनखल थाने में गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।

एक आरोपी ने किया था सरेंडर

घटना के बाद पुलिस आरोपियों की तलाश में जुट गई थी। इस बीच अतुल चौहान ने खुद कनखल थाने पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया था। जबकि बाकी तीन आरोपी फरार चल रहे थे। गिरफ्तारी से बचने के लिए तरुण चौहान ने अदालत में अग्रिम जमानत की याचिका भी दाखिल की थी, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया। इसके बाद पुलिस ने सक्रियता बढ़ाते हुए सहारनपुर में दबिश दी और तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के आदेश दिए गए।

गिरफ्तारी के बाद थाने में विरोध प्रदर्शन

तरुण चौहान की गिरफ्तारी की खबर सामने आते ही उनके समर्थक कनखल थाने पहुंच गए। देखते ही देखते थाना परिसर के बाहर समर्थकों की भीड़ जुट गई। कुछ महिलाओं ने पुलिस कार्रवाई के खिलाफ धरना देते हुए नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि पुलिस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं कर रही है और एक पक्ष के दबाव में काम कर रही है।

धरने में शामिल महिलाओं ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी नाराजगी जताई और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए थाने में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था।

पुलिस पर लगाए पक्षपात के आरोप

प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि तरुण चौहान ने इलाके में हो रही अवैध प्लॉटिंग का विरोध किया था, जिसके बाद उन्हें इस मामले में फंसाया गया है। उनका आरोप था कि पुलिस बिना पूरी जांच के कार्रवाई कर रही है। महिलाओं ने कहा कि शिकायत करने के बजाय उन्हें ही सजा दी जा रही है।

हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर कार्रवाई की जा रही है।

आरोपियों की लोकेशन को लेकर उठे सवाल

इस मामले में एक और पहलू चर्चा में आया जब यह सामने आया कि जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित चौहान को आरोपियों की लोकेशन मिलने के बाद पुलिस टीम को इसकी जानकारी दी गई। इसके बाद पुलिस ने संबंधित स्थान पर पहुंचकर आरोपियों को गिरफ्तार किया। इस घटनाक्रम के बाद यह सवाल भी उठने लगे कि पुलिस को पहले से आरोपियों का पता क्यों नहीं चल पाया।

जांच की निगरानी का आश्वासन

थाने के बाहर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच सीओ सिटी शिशुपाल सिंह नेगी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे लोगों से बातचीत की और उन्हें भरोसा दिलाया कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी। करीब दो घंटे तक चले धरने के बाद स्थिति सामान्य हुई। अधिकारियों ने बताया कि दोनों पक्षों की ओर से मामले दर्ज किए गए हैं और जांच प्रक्रिया जारी है।

इस बीच जेल ले जाते समय तरुण चौहान ने मीडिया से बातचीत में कुछ राजनीतिक नेताओं पर दबाव बनाकर कार्रवाई कराने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पुलिस एकतरफा कार्रवाई कर रही है और जमीन से जुड़े विवाद के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।

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