ElectricityTariff – उद्योगों के लिए बदली बिजली दरें, समय के हिसाब से आएगा बिल…
ElectricityTariff – उत्तराखंड में उद्योगों के लिए बिजली की दरों में बड़ा बदलाव किया गया है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने नई टैरिफ व्यवस्था लागू करते हुए बिजली के उपयोग को समय के आधार पर विभाजित कर दिया है। एक अप्रैल से लागू इस नई व्यवस्था के तहत अब उद्योगों का बिजली बिल केवल खपत पर नहीं, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करेगा कि बिजली का इस्तेमाल किस समय किया गया।

टाइम ऑफ डे टैरिफ से बिलिंग में बदलाव
नई नीति के तहत टाइम ऑफ डे टैरिफ लागू किया गया है, जिससे बिजली के उपयोग को तीन अलग-अलग समय खंडों में बांटा गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य बिजली की मांग को संतुलित करना और उपभोक्ताओं को सस्ते समय में अधिक उपयोग के लिए प्रेरित करना है। आयोग का मानना है कि इससे ऊर्जा प्रबंधन अधिक प्रभावी होगा और बिजली वितरण प्रणाली पर दबाव कम पड़ेगा।
पीक, सोलर और नॉर्मल समय की अलग दरें
आयोग ने दिन को तीन श्रेणियों में बांटा है। पहली श्रेणी पीक आवर्स की है, जिसमें बिजली सबसे महंगी होगी। सर्दियों में सुबह 6 से 9 बजे और शाम 6 से 10 बजे तक यह समय लागू रहेगा, जबकि गर्मियों में शाम 6 से 11 बजे तक पीक आवर्स माने जाएंगे। दूसरी श्रेणी सोलर आवर्स की है, जो सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक रहेगी, इस दौरान बिजली दरें सबसे कम होंगी। तीसरी श्रेणी नॉर्मल आवर्स की है, जिसमें सामान्य दरें लागू रहेंगी।
एलटी और एचटी उद्योगों के लिए तय दरें
नई दरों के अनुसार एलटी उद्योगों के लिए नॉर्मल समय में 5.75 रुपये प्रति यूनिट, पीक समय में 7.48 रुपये और सोलर समय में 4.46 रुपये प्रति यूनिट तय किए गए हैं। वहीं एचटी उद्योगों के लिए नॉर्मल आवर्स में 6.85 रुपये, पीक में 8.91 रुपये और सोलर आवर्स में 5.31 रुपये प्रति यूनिट की दर लागू होगी। जिन एचटी उद्योगों का लोड 50 प्रतिशत से अधिक है, उनके लिए दरों में कुछ राहत दी गई है।
मीटर रीडिंग और बिलिंग प्रक्रिया में बदलाव
नई व्यवस्था के तहत टाइम ऑफ डे मीटर की रीडिंग केवल मीटर रीडिंग इंस्ट्रूमेंट के माध्यम से ही ली जाएगी। इसमें छेड़छाड़ की जानकारी और लोड सर्वे का पूरा विवरण शामिल होगा। यदि किसी उद्योग का लोड बहुत कम या शून्य पाया जाता है, तो ऐसी स्थिति में सामान्य तरीके से रीडिंग नहीं ली जाएगी। इसके बजाय बिजली विभाग बाहरी लोड को जोड़कर बिल तैयार करेगा।
उपभोक्ताओं को रिपोर्ट की सुविधा
उद्योग उपभोक्ताओं को अब अपने बिजली बिल के साथ एमआरआई सारांश रिपोर्ट भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे वे अपने उपयोग का पूरा विवरण समझ सकेंगे। इसके अलावा 15 रुपये का अतिरिक्त शुल्क देकर विस्तृत लोड सर्वे रिपोर्ट भी प्राप्त की जा सकती है। इस सुविधा का उद्देश्य उपभोक्ताओं को पारदर्शिता के साथ जानकारी देना और उन्हें अपने उपयोग को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में मदद करना है।



