उत्तराखण्ड

Electricity Theft Vigilance Raid Roorkee: रुड़की में विजिलेंस की महा-छापेमारी से मचा हड़कंप, अब थमेगी बिजली की लूट…

Electricity Theft Vigilance Raid Roorkee: उत्तराखंड के रुड़की विद्युत वितरण मंडल में बुधवार की सुबह किसी सामान्य दिन की तरह नहीं थी। ऊर्जा निगम की विजिलेंस टीम ने एक सुनियोजित रणनीति के तहत इलाके के पांच गांवों—घोड़ेवाला, मरगूबपुर, भौरी डेरा, बेहडेकी और बेलडा को पूरी तरह (Action Against Power Pilferage) से घेर लिया। भारी पुलिस बल और सतर्क अधिकारियों की मौजूदगी देखकर ग्रामीणों के होश उड़ गए। यह कार्रवाई इतनी गोपनीय और तेज थी कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। जैसे ही विजिलेंस की गाड़ियां गांवों में दाखिल हुईं, वैसे ही पूरे क्षेत्र में खलबली मच गई और बिजली चोरी करने वालों में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया।

Electricity Theft Vigilance Raid Roorkee
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छतों पर मची केबल हटाने की होड़ और 160 मामले

विजिलेंस की टीम को देखते ही ग्रामीणों की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। कई लोग अपनी छतों पर चढ़कर बिजली के खंभों से अवैध रूप से डाली गई ‘कटिया’ या अतिरिक्त केबल को आनन-फानन में हटाने की (Checking Illegal Electricity Connections) कोशिश करने लगे। हालांकि, टीम की पैनी नजरों से बचना नामुमकिन था। एक के बाद एक घर, दुकान और आटा चक्की जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को खंगालने पर कुल 160 मामले सीधे तौर पर बिजली चोरी के पकड़े गए। विजिलेंस ने मौके पर ही अवैध केबल और मीटरों को जब्त कर उन्हें सील कर दिया, जिससे निगम को होने वाले बड़े राजस्व नुकसान का खुलासा हुआ।

सिफारिशों का दौर शुरू: अधिकारियों के पास पहुंचे रसूखदारों के फोन

जैसे ही कार्रवाई ने जोर पकड़ा, पकड़े गए लोगों ने अपनी जान छुड़ाने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों और रसूखदारों का सहारा लेना शुरू कर दिया। सुबह से ही ऊर्जा निगम (Operational Transparency in Utilities) के अधिकारियों के फोन घनघनाने लगे। गांव से लेकर शहर तक के नेताओं ने कार्रवाई को रुकवाने या हल्का करने के लिए दबाव बनाने की कोशिश की। लेकिन, विजिलेंस टीम ने साफ कर दिया कि यह अभियान पूरी तरह निष्पक्ष है और किसी भी राजनीतिक दबाव के आगे झुकने के बजाय कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। अधिकारियों की इस दृढ़ता ने साफ कर दिया कि अब बिजली चोरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

घरों में ताले लगाकर भागे ग्रामीण: दहशत का ऐसा मंजर

पुलिस और विजिलेंस की संयुक्त टीम जब घरों की जांच करने पहुंची, तो कई जगहों पर नजारा हैरान करने वाला था। अपनी चोरी पकड़े जाने के डर से कई ग्रामीण अपने घरों और दुकानों (Public Fear of Legal Consequences) पर ताले लगाकर मौके से फरार हो गए। टीम ने बंद घरों के बाहर लटकती अवैध तारों को काटकर यह सुनिश्चित किया कि भविष्य में वहां से बिजली की चोरी न हो सके। आटा चक्की और छोटे कारखानों में जिस तरह से सीधे लाइनों से बिजली खींची जा रही थी, उसने विभाग को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि यह गोरखधंधा कितने बड़े स्तर पर फल-फूल रहा था।

सगे-संबंधियों को फोन पर दी चेतावनी: नेटवर्क हुआ अलर्ट

जैसे ही एक गांव में छापा पड़ता, वहां के लोग तुरंत अपने अन्य गांवों में रहने वाले रिश्तेदारों को फोन कर अलर्ट करने लगे। रुड़की के साथ-साथ मंगलौर, कलियर, धनौरी और झबरेड़ा (Social Communication During Law Enforcement) जैसे इलाकों में दिनभर यह चर्चा बनी रही कि विजिलेंस की अगली लोकेशन क्या होगी। ग्रामीण सोशल मीडिया और फोन के जरिए विजिलेंस के रूट की जानकारी जुटाते रहे ताकि टीम के पहुंचने से पहले ही साक्ष्य मिटाए जा सकें। इस नेटवर्क ने विभाग के काम को चुनौतीपूर्ण तो बनाया, लेकिन टीम ने अपनी प्लानिंग से कई और जगहों पर भी दबिश दी।

बकायेदारों की चालाकी पड़ी भारी: कटने के बाद फिर जोड़े थे तार

अधिशासी अभियंता अनिल कुमार मिश्रा के अनुसार, ऊर्जा निगम रोजाना 100 से अधिक बकायेदारों के कनेक्शन काट रहा है। लेकिन जांच में यह तथ्य सामने आया कि कई लोग कनेक्शन कटने (Recovering Revenue Losses for Discoms) के अगले ही दिन चोरी-छिपे फिर से तार जोड़ लेते थे। निगम के पास ऐसी सूचनाएं पहले से मौजूद थीं, जिसके आधार पर इन गांवों को चिन्हित किया गया था। सहायक अभियंता धनंजय के नेतृत्व में टीम ने न केवल चोरी पकड़ी, बल्कि पुराने बकायेदारों की भी नब्ज टटोली। आरोपियों के खिलाफ संबंधित थानों में गंभीर धाराओं के तहत रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है।

विभाग की सख्त चेतावनी: जारी रहेगा बिजली चोरी रोको अभियान

विजिलेंस की इस बड़ी कार्रवाई ने उन लोगों को कड़ा संदेश दिया है जो ईमानदारी से बिल भरने वाले उपभोक्ताओं के हक पर डाका डाल रहे हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि रुड़की मंडल (Sustained Vigilance Campaigns) के अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में भी आने वाले दिनों में इसी तरह की ताबड़तोड़ छापेमारी जारी रहेगी। ऊर्जा निगम का लक्ष्य न केवल लाइन लॉस को कम करना है, बल्कि उन अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाना है जो सार्वजनिक संसाधनों का अवैध दोहन कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि इस कार्रवाई के बाद बिजली चोरी के आंकड़ों में कितनी गिरावट आती है।

कानून का डंडा और जनता की जिम्मेदारी

अंधेरे के इन सौदागरों के खिलाफ हुई इस ‘स्ट्राइक’ ने साबित कर दिया है कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं। बिजली चोरी न केवल एक अपराध है बल्कि (Ethical Responsibility of Electricity Consumers) यह बिजली संकट और बार-बार होने वाले ट्रिपिंग का मुख्य कारण भी है। अगर आम नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझते हुए चोरी के खिलाफ आवाज उठाएं और वैध कनेक्शन का इस्तेमाल करें, तभी चौबीसों घंटे बिजली का सपना साकार हो सकता है। फिलहाल, रुड़की के इन पांच गांवों में हुई कार्रवाई ने पूरे उत्तराखंड के बिजली चोरों की रातों की नींद हराम कर दी है।

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