उत्तराखण्ड

CyberFraud – जौलीग्रांट एयरपोर्ट हेल्पलाइन के नाम पर परिवार से 1.63 लाख की ठगी

CyberFraud – देहरादून के जौलीग्रांट हवाई अड्डे से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां फर्जी हेल्पलाइन नंबर के जरिए ठगों ने एक परिवार से एक लाख 63 हजार रुपये हड़प लिए। पीड़ित परिवार ने जब एयरपोर्ट पर छूटा सामान वापस पाने की कोशिश की, तब उन्हें इस धोखाधड़ी का सामना करना पड़ा। मामले में बसंत विहार थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है और पुलिस जांच में जुटी है।

छूटा सामान बना ठगी का जरिया

जीएमएस रोड स्थित वंसुधरा अपार्टमेंट निवासी अरविंद कृष्ण गुप्ता के अनुसार, हाल ही में उनका कुछ सामान जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर रह गया था। सामान की जानकारी लेने के लिए उनकी पत्नी ने इंटरनेट पर एयरपोर्ट का हेल्पलाइन नंबर खोजा। सर्च रिजल्ट में मिले नंबर पर कॉल करने पर सामने वाले व्यक्ति ने खुद को एयरपोर्ट से जुड़ा कर्मचारी बताया। उसने भरोसा दिलाया कि मामूली प्रक्रिया शुल्क के रूप में पांच रुपये का ऑनलाइन भुगतान करने पर सामान घर तक पहुंचा दिया जाएगा।

पांच रुपये के बहाने शुरू हुआ खेल

परिवार ने बातों पर विश्वास करते हुए यूपीआई के माध्यम से पांच रुपये भेज दिए। कुछ ही देर बाद कॉल करने वाले ने कहा कि भुगतान प्राप्त नहीं हुआ है और दोबारा पांच रुपये ट्रांसफर करने को कहा। संदेह न करते हुए इस बार पति के मोबाइल से भी पांच रुपये भेज दिए गए। मामूली राशि होने के कारण उन्हें किसी बड़े खतरे का अंदेशा नहीं हुआ।

मोबाइल हैक और बैंक खातों से निकासी

पीड़ित ने बताया कि भुगतान के कुछ ही समय बाद दोनों मोबाइल फोन में गड़बड़ी शुरू हो गई। बैंकिंग एप्लिकेशन अचानक गायब हो गए और फोन सामान्य तरीके से काम नहीं कर रहे थे। इसी दौरान ठगों ने उनके तीन अलग-अलग बैंक खातों से कुल 1,63,000 रुपये निकाल लिए। रकम कटने के बाद परिवार को ठगी का एहसास हुआ। उन्होंने तुरंत बैंक से संपर्क किया, लेकिन तब तक पैसा ट्रांसफर हो चुका था।

तुरंत दर्ज कराई साइबर शिकायत

घटना के दिन ही सुबह करीब 10:45 बजे पीड़ित ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद स्थानीय थाने में भी मामला दर्ज कराया गया। पुलिस के अनुसार, तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है और संबंधित खातों की जानकारी जुटाई जा रही है।

पुलिस की अपील और सावधानी की जरूरत

बसंत विहार थाना प्रभारी अशोक राठौर ने बताया कि ऐसे मामलों में आमतौर पर फर्जी हेल्पलाइन नंबर सर्च इंजन पर विज्ञापन या भ्रामक लिस्टिंग के जरिए सामने आते हैं। लोग जल्दबाजी में नंबर की पुष्टि किए बिना कॉल कर लेते हैं, जिससे ठगों को मौका मिल जाता है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संस्थान का आधिकारिक नंबर संबंधित वेबसाइट या विश्वसनीय स्रोत से ही लें।

विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे भुगतान के बहाने ठग अक्सर लोगों को जाल में फंसाते हैं। पांच या दस रुपये जैसी मामूली रकम मांगकर वे भरोसा जीतते हैं और बाद में मोबाइल या बैंकिंग डिटेल तक पहुंच बना लेते हैं। यदि किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर ऑनलाइन भुगतान किया गया हो और फोन में असामान्य गतिविधि दिखे, तो तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए।

बढ़ते साइबर मामलों के बीच यह घटना एक और चेतावनी है कि डिजिटल लेन-देन में सतर्कता बेहद जरूरी है। आधिकारिक वेबसाइट की पुष्टि, अनजान लिंक या कॉल से दूरी और समय रहते शिकायत दर्ज करना ही ऐसे अपराधों से बचाव का प्रभावी तरीका है।

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