CongressStrategy – 2027 चुनाव से पहले प्रदेश कांग्रेस में संगठन पुनर्गठन की चुनौती
CongressStrategy – सत्ता में वापसी की तैयारी कर रही प्रदेश कांग्रेस इस समय अपने संगठनात्मक ढांचे को लेकर असमंजस में है। एक ओर पार्टी नेतृत्व 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए नई और प्रभावी टीम बनाना चाहता है, तो दूसरी ओर पदों की लंबी कतार और अंदरूनी दावेदारी प्रक्रिया को जटिल बना रही है। हालात यह हैं कि कार्यकर्ताओं की संख्या कम नहीं है, लेकिन ज्यादातर नेता संगठन में जिम्मेदारी लेने से अधिक पद पाने की होड़ में दिखाई दे रहे हैं।

संगठन में पदों की लंबी प्रतीक्षा सूची
प्रदेश कांग्रेस कमेटी का गठन वर्ष 2022 के बाद से लंबित है। पूर्व अध्यक्ष प्रीतम सिंह के कार्यकाल में बनी कार्यकारिणी में दो सौ से अधिक पदाधिकारी शामिल किए गए थे। उस समय संगठन को व्यापक प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई थी। हालांकि, उसके बाद नेतृत्व में बदलाव हुआ, लेकिन संगठनात्मक ढांचे में अपेक्षित संशोधन नहीं हो पाया। अध्यक्ष बदले, मगर टीम लगभग वैसी ही बनी रही।
सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में कई वरिष्ठ नेताओं और जिलास्तरीय दावेदारों ने अपने-अपने समर्थकों के नाम प्रस्तावित किए हैं। इससे चयन प्रक्रिया और जटिल हो गई है। पार्टी के भीतर यह चर्चा भी है कि पदों की संख्या सीमित रखी जाए, लेकिन दावेदारों की बढ़ती सूची निर्णय में विलंब का कारण बन रही है।
हाईकमान की रणनीति: छोटी और प्रभावी टीम
केंद्रीय नेतृत्व की प्राथमिकता एक ऐसी टीम तैयार करना है जो आगामी चुनावी चुनौती का मजबूती से सामना कर सके। माना जा रहा है कि हाईकमान इस बार छोटी, संतुलित और जिम्मेदारी आधारित कार्यकारिणी चाहता है। यानी केवल पद बांटने के बजाय हर पदाधिकारी को स्पष्ट कार्य सौंपा जाए।
पार्टी सूत्र बताते हैं कि दिल्ली में इस मुद्दे पर कई दौर की बैठकों में चर्चा हो चुकी है। रणनीति यह है कि संगठन में ऊर्जा और अनुभव दोनों का संतुलन हो। युवा चेहरों को मौका देने के साथ-साथ अनुभवी नेताओं को भी जिम्मेदारी दी जाए, ताकि चुनावी प्रबंधन और जनसंपर्क दोनों मोर्चों पर पार्टी मजबूत दिखे।
नेतृत्व परिवर्तन के बाद भी गठन लंबित
प्रदेश कांग्रेस की कमान अब गणेश गोदियाल के हाथ में है। उन्होंने 16 नवंबर 2025 को अध्यक्ष पद संभाला। पदभार ग्रहण करने के बाद से ही संगठन के पुनर्गठन की चर्चा तेज हुई, लेकिन अब तक औपचारिक घोषणा नहीं हो सकी है।
इससे पहले करन माहरा ने अध्यक्ष रहते हुए नई टीम बनाने का प्रयास किया था, परंतु उस प्रस्ताव को केंद्रीय स्तर पर मंजूरी नहीं मिल पाई। परिणामस्वरूप, पार्टी ने लोकसभा चुनाव और मंगलौर, बदरीनाथ व केदारनाथ विधानसभा उपचुनाव पुराने ढांचे के साथ ही लड़े। हालांकि, कांग्रेस मंगलौर और बदरीनाथ सीट पर जीत दर्ज करने में सफल रही, जिससे कार्यकर्ताओं का मनोबल कुछ हद तक बढ़ा।
दावेदारी और संतुलन की चुनौती
पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती संतुलन साधने की है। प्रदेश स्तर पर वरिष्ठ नेताओं की अपनी-अपनी प्राथमिकताएं हैं और हर खेमे की ओर से नामों की सूची भेजी गई है। ऐसे में अंतिम निर्णय तक पहुंचना आसान नहीं है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि संगठनात्मक ढांचा समय रहते स्पष्ट नहीं हुआ, तो जमीनी स्तर पर तैयारी प्रभावित हो सकती है। 2027 का चुनाव भले अभी दूर हो, लेकिन रणनीतिक रूप से यह समय संगठन को मजबूत करने का है।
आगे की राह
प्रदेश कांग्रेस के लिए आने वाले कुछ सप्ताह अहम माने जा रहे हैं। यदि छोटी और कार्यक्षम टीम का गठन हो जाता है, तो पार्टी कार्यकर्ताओं में स्पष्ट संदेश जाएगा कि संगठन अब चुनावी मोड में है। वहीं, यदि प्रक्रिया लंबी खिंचती है, तो अंदरूनी असंतोष बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल सभी की नजरें केंद्रीय नेतृत्व के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि प्रदेश कांग्रेस 2027 की तैयारी किस रूप में और किस टीम के साथ करेगी।



