उत्तराखण्ड

CharDhamYatra – गंगोत्री हाईवे की हालत खराब, यात्रा से पहले बढ़ी चिंता

CharDhamYatra – चारधाम यात्रा शुरू होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं, लेकिन गंगोत्री हाईवे की स्थिति अब भी चिंता का विषय बनी हुई है। हालिया आपदा के बाद सड़क पर बड़े पैमाने पर सुधार कार्य नहीं हो पाए हैं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अभी तक केवल मलबा हटाने जैसे सीमित कार्य किए गए हैं, जबकि कई स्थानों पर सड़कें अब भी क्षतिग्रस्त हालत में हैं। ऐसे में यात्रा के दौरान संभावित जोखिम को लेकर स्थानीय प्रशासन और यात्रियों दोनों में चिंता देखी जा रही है।

आपदा के बाद भी अधूरी रही मरम्मत की प्रक्रिया

गंगोत्री मार्ग पर आपदा के बाद जरूरी मरम्मत और सुरक्षा कार्यों की रफ्तार धीमी रही है। जानकारी के अनुसार, सीमा सड़क संगठन ने कई संवेदनशील स्थानों पर केवल अस्थायी समाधान किए हैं। जहां सड़कें नदी के तेज बहाव में बह गई थीं, वहां पक्के निर्माण के बजाय कच्चे रास्ते तैयार कर दिए गए हैं। इन अस्थायी व्यवस्थाओं के कारण बारिश या भारी यातायात के दौरान मार्ग के फिर से बाधित होने का खतरा बना हुआ है।

भूस्खलन वाले क्षेत्रों में बढ़ सकता है खतरा

लीसौड़ से गंगोत्री धाम तक करीब 135 किलोमीटर लंबे इस मार्ग में कई ऐसे हिस्से हैं, जहां भूस्खलन का खतरा लगातार बना हुआ है। नगुण, धरासू और नालूपानी जैसे इलाके पहले से ही संवेदनशील माने जाते हैं। इन क्षेत्रों में पहाड़ी ढलानों की अस्थिरता के कारण कभी भी मलबा गिर सकता है, जिससे यातायात प्रभावित हो सकता है। विशेष रूप से मानसून के दौरान ये जोखिम और बढ़ जाता है।

सुरक्षा दीवार भी नहीं झेल पाई बारिश का दबाव

धरासू बैंड के पास बनाई गई सुरक्षा दीवार एक साल भी टिक नहीं पाई और पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त हो गई। इसके कारण सड़क पर भू-धंसाव की स्थिति उत्पन्न हो गई, जिसे अब तक पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सका है। यह स्थिति निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े करती है। यात्रियों के लिए यह हिस्सा विशेष रूप से जोखिम भरा माना जा रहा है।

कई स्थानों पर अब भी लटके हैं बड़े बोल्डर

उत्तरकाशी से भटवाड़ी के बीच कई स्थानों पर बड़े-बड़े पत्थर अब भी पहाड़ियों पर अस्थिर स्थिति में हैं। नेताला, बिशनपुर और नलूणा जैसे क्षेत्रों में ये बोल्डर कभी भी गिर सकते हैं, जिससे मार्ग अवरुद्ध होने की आशंका बनी रहती है। इसके अलावा, भटवाड़ी क्षेत्र में भू-धंसाव के चलते सड़कें कमजोर हो चुकी हैं, जिससे आवाजाही के दौरान सावधानी बरतना जरूरी है।

प्रशासन की समयसीमा के बावजूद सुधार अधूरा

प्रशासन ने सड़क सुधार के लिए समयसीमा तय की थी, लेकिन तय अवधि के भीतर कार्य पूरा नहीं हो सका। इससे यह स्पष्ट होता है कि परियोजना में अपेक्षित गति नहीं लाई जा सकी। हालांकि, संबंधित अधिकारियों का कहना है कि संवेदनशील क्षेत्रों में वैकल्पिक उपाय किए जा रहे हैं और मशीनों को हर समय तैयार रखा जाएगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई हो सके।

यात्रियों के लिए सावधानी और तैयारी जरूरी

चारधाम यात्रा के दौरान इस मार्ग से गुजरने वाले श्रद्धालुओं को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है। मौसम की स्थिति, मार्ग की जानकारी और प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करना जरूरी होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यात्रा से पहले सड़क की स्थिति में सुधार और बेहतर प्रबंधन आवश्यक है, ताकि श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित और सुगम हो सके।

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