CensusUpdate – उत्तराखंड में 10 अप्रैल से शुरू होगी जनगणना की प्रक्रिया
CensusUpdate – उत्तराखंड में जनगणना की तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। राज्य में जनगणना के पहले चरण की शुरुआत 10 अप्रैल से होगी, जिसकी औपचारिक शुरुआत राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) करेंगे। इस चरण में भवनों की स्व-गणना और मकान सूचीकरण का कार्य किया जाएगा। प्रशासन ने इस पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित ढंग से पूरा करने के लिए बड़ी टीम तैनात की है, जिसमें हजारों कर्मचारी शामिल हैं।

पहले चरण में बड़ी टीम की तैनाती
जनगणना के इस चरण में कुल 30,839 कर्मियों को लगाया गया है। इनमें 4,491 सुपरवाइजर और 26,348 प्रगणक शामिल हैं। ये टीमें 25 अप्रैल से 24 मई तक घर-घर जाकर मकानों का विवरण एकत्र करेंगी। अधिकारियों के अनुसार, इस चरण में मकानों की स्थिति, उपयोग और अन्य बुनियादी जानकारी दर्ज की जाएगी, जिससे आगे की जनगणना प्रक्रिया को आधार मिलेगा।
स्व-गणना का विकल्प भी उपलब्ध
जनगणना विभाग ने इस बार लोगों को स्वयं जानकारी दर्ज करने का विकल्प भी दिया है। 10 अप्रैल से 24 अप्रैल के बीच नागरिक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी भर सकते हैं। यह सुविधा 16 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध होगी, जिससे अधिक से अधिक लोग आसानी से इसमें भाग ले सकें। स्व-गणना करने के बाद नागरिकों को एक विशेष पहचान संख्या मिलेगी, जिसे बाद में प्रगणक को देना होगा।
दूसरे चरण की भी तय समयसीमा
अधिकारियों ने बताया कि जनगणना का दूसरा चरण सितंबर में आयोजित किया जाएगा। विशेष रूप से हिमालयी जिलों—चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी—के 131 गांवों और तीन शहरी क्षेत्रों में 11 से 30 सितंबर के बीच यह कार्य पूरा किया जाएगा। इन क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए अलग समय निर्धारित किया गया है।
बंद या खाली मकानों की भी होगी गणना
पहाड़ी क्षेत्रों में कई मकान लंबे समय से बंद या खाली पड़े हैं। जनगणना टीम ऐसे भवनों को भी सूची में शामिल करेगी। यदि कोई मकान बंद मिलता है, तो उसे ‘लॉक हाउस’ के रूप में दर्ज किया जाएगा। इससे वास्तविक स्थिति का सही आकलन करने में मदद मिलेगी और भविष्य की योजनाओं के लिए सटीक आंकड़े उपलब्ध होंगे।
डिजिटल माध्यम से होगा पूरा डेटा संग्रह
इस बार जनगणना प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाया गया है। प्रगणक और पर्यवेक्षक मोबाइल एप के जरिए डेटा एकत्र करेंगे। इसके साथ ही निगरानी और प्रबंधन के लिए एक विशेष पोर्टल का उपयोग किया जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित बनी रहे। अधिकारियों का मानना है कि इससे त्रुटियों की संभावना कम होगी और आंकड़ों की सटीकता बढ़ेगी।
लोगों से भागीदारी की अपील
जनगणना विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लें। अधिकारियों के अनुसार, सही और पूर्ण जानकारी देना बेहद जरूरी है, ताकि राज्य की योजनाएं वास्तविक जरूरतों के अनुसार बनाई जा सकें। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि सभी जानकारी सुरक्षित रखी जाएगी और केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए उपयोग होगी।



