Bageshwar Leopard Attack: आग की लपटों और खूंखार दरिंदे के बीच फंसी मां, जानें डिटेल में…
Bageshwar Leopard Attack: उत्तराखंड के बागेश्वर जिले से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है, जिसने इंसान और प्रकृति के बीच बढ़ते असंतुलन की डरावनी तस्वीर पेश की है। छाती मनकोट गांव में एक बुजुर्ग महिला न केवल धधकते जंगलों की लपटों से जूझ रही थी, बल्कि उसे इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि मौत झाड़ियों में छिपे (Wildlife Predatory Behavior) के रूप में उसका इंतजार कर रही है। यह घटना केवल एक हादसे की खबर नहीं है, बल्कि उस बेबसी की दास्तां है जहां एक मां अपने घर और पशुओं के चारे को बचाने की जद्दोजहद में अपनी जान गंवा बैठी।

घास के ढेर को बचाने की कोशिश और गुलदार का हमला
63 वर्षीय देवकी देवी अपने घर के पास रखे घास के ढेर को जंगल की आग से बचाने की कोशिश कर रही थीं। आग की लपटें गांव की दहलीज तक आ पहुंची थीं, जिससे पालतू जानवरों के सालभर के चारे को जलने का खतरा पैदा हो गया था। देवकी देवी जैसे ही पानी लाने के लिए थोड़ा आगे बढ़ीं, अंधेरे और धुएं का फायदा उठाकर (Leopard Ambush Tactics) एक खूंखार गुलदार ने उन पर हमला कर दिया। गुलदार उन्हें घसीटते हुए गहरे जंगलों की ओर ले गया, जिससे गांव में चीख-पुकार मच गई।
रात के अंधेरे में चले सर्च ऑपरेशन का दर्दनाक अंत
महिला के गायब होने की सूचना मिलते ही गांव में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में ग्रामीणों ने वन विभाग की टीम को सूचित किया। रात के घने अंधेरे और जंगल में लगी आग के बीच (Community Search Mission) शुरू किया गया। ग्रामीण दीपक खेतवाल और अन्य लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर घंटों तक झाड़ियों और आग की लपटों के बीच देवकी देवी को तलाशा। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था; घंटों की मशक्कत के बाद टीम को महिला का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ, जिसने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया।
आग और आतंक के बीच फंसी ग्रामीणों की जिंदगी
जंगल की आग ने केवल पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाया है, बल्कि इसने जंगली जानवरों को भी हिंसक बना दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब जंगल सुलगते हैं, तो (Habitat Displacement Issues) की वजह से गुलदार जैसे शिकारी जानवर बस्तियों का रुख करने लगते हैं। सर्च टीम में शामिल ग्रामीणों ने बताया कि आग बुझाने की चुनौती के बीच इस तरह का जानलेवा हमला उनके लिए किसी दोहरी मार से कम नहीं है। अब गांव के लोग अपने ही घरों के बाहर निकलने से कतरा रहे हैं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आधिकारिक बयान का इंतजार
बागेश्वर के प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) आदित्य रत्न ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत वन कर्मियों की टीम को मौके पर तैनात किया। शुरुआती जांच में महिला के सिर पर गहरे चोट के निशान पाए गए हैं, जो गुलदार के घातक प्रहार की ओर इशारा करते हैं। हालांकि, विभाग ने स्पष्ट किया है कि (Post Mortem Examination) की रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों और हमले की प्रकृति की आधिकारिक पुष्टि की जा सकेगी। फिलहाल, वन विभाग ने इलाके में गश्त बढ़ा दी है।
आग लगाने वाले ‘अराजकतत्वों’ पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी
जंगलों में बढ़ती आग की घटनाओं पर प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। डीएफओ के अनुसार, यह आग प्राकृतिक नहीं बल्कि कुछ अराजकतत्वों की सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। इन (Forest Arson Incidents) को रोकने के लिए अब वन विभाग और पुलिस की एक संयुक्त टीम गठित की गई है। प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि जो भी व्यक्ति जंगलों में आग लगाते हुए पाया जाएगा, उस पर गैर-जमानती धाराओं में मुकदमा दर्ज कर सख्त जेल भेजा जाएगा।
पहाड़ों में बढ़ता मानव-वन्यजीव संघर्ष
देवकी देवी की मौत ने एक बार फिर उत्तराखंड के पहाड़ों में मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को चर्चा में ला दिया है। संसाधनों की कमी और (Human Wildlife Conflict) के कारण आए दिन पहाड़ी क्षेत्रों से ऐसी दुखद खबरें आती रहती हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग केवल घटना के बाद जागता है, जबकि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम पहले ही किए जाने चाहिए थे। इस घटना ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था और वन्यजीव प्रबंधन की खामियों को उजागर कर दिया है।
क्या अब सुरक्षित रहेंगे बागेश्वर के सीमांत गांव?
इस हृदयविदारक घटना के बाद छाती मनकोट और आसपास के गांवों में मातम और आक्रोश का माहौल है। लोग मांग कर रहे हैं कि हमलावर गुलदार को आदमखोर घोषित कर जल्द से जल्द पकड़ा जाए। (Rural Public Safety) को सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने पिंजरा लगाने की कवायद शुरू कर दी है, लेकिन सवाल वही बना हुआ है कि क्या सरकारी सहायता और आश्वासन उस परिवार का दर्द कम कर पाएंगे जिसने अपनी बुजुर्ग मां को इतनी क्रूर परिस्थितियों में खो दिया।



