Avalanche Warning Uttarakhand: उत्तराखंड के पांच जिलों में हिमस्खलन की चेतावनी, डीजीआरई ने जारी किया हाई अलर्ट
Avalanche Warning Uttarakhand: उत्तराखंड के ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में मौसम के बदलते मिजाज ने चिंता बढ़ा दी है। रक्षा भू-सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान (डीजीआरई) ने राज्य के विभिन्न ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी और उसके बाद संभावित हिमस्खलन को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। इस नवीनतम (Weather Forecast Analysis) के मुताबिक, शुक्रवार शाम से शनिवार शाम तक की अवधि बेहद संवेदनशील मानी जा रही है। विशेष रूप से उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जैसे सीमांत जनपदों में बर्फ खिसकने की घटनाओं का खतरा सबसे अधिक बना हुआ है, जिसके चलते प्रशासन को पूरी तरह मुस्तैद रहने को कहा गया है।

डेंजर लेवल-3 की श्रेणी में रखे गए चार प्रमुख जिले
डीजीआरई द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, चार जिलों को डेंजर लेवल-3 की श्रेणी में रखा गया है, जो काफी उच्च जोखिम को दर्शाता है। वहीं, बागेश्वर जिले को लेवल-2 की श्रेणी में रखा गया है, जहां मध्यम खतरे की आशंका है। इन (High Altitude Glaciers) वाले क्षेत्रों में अचानक बर्फबारी होने से ढलानों पर जमी बर्फ के अस्थिर होने का डर रहता है, जिससे जान-माल का नुकसान हो सकता है। सरकार ने इन इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों और तैनात सुरक्षा बलों को हर छोटी हलचल पर नजर रखने की सलाह दी है।
राज्य प्रशासन और आपदा प्रबंधन दल अलर्ट मोड पर
हिमस्खलन की आशंका को देखते हुए राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र ने तत्परता दिखाते हुए संबंधित जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। वर्तमान में एसडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय रेखीय विभागों को (Emergency Response Team) के रूप में सक्रिय रहने का आदेश मिला है। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास, विनोद कुमार सुमन ने कहा है कि संवेदनशील स्थानों पर सतत निगरानी रखी जाए ताकि किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में कम से कम समय में राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया जा सके।
पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण एडवाइजरी
प्रशासन ने पर्यटकों, तीर्थयात्रियों और पर्वतीय क्षेत्रों में आवागमन करने वाले लोगों से अपील की है कि वे मौसम साफ होने तक अनावश्यक यात्रा से बचें। ऊंचे पहाड़ी रास्तों पर चलते समय (Travel Safety Guidelines) का पालन करना अनिवार्य है क्योंकि ताजा बर्फबारी के बाद सड़कें फिसलन भरी हो जाती हैं और किसी भी समय एवलांच आने का खतरा बना रहता है। विशेष रूप से पर्वतारोहियों और ट्रेकिंग के शौकीनों को फिलहाल इन रास्तों पर जाने से रोक दिया गया है ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
हिमस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में रुकने से बचने की सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि जो क्षेत्र पूर्व में हिमस्खलन से प्रभावित रह चुके हैं, वहां रुकना या शिविर लगाना जोखिम भरा हो सकता है। यदि आप वर्तमान में अधिक बर्फबारी वाले क्षेत्र में फंसे हैं, तो (Disaster Risk Reduction) के तहत एक-दो दिन के लिए निचले और अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थानों पर चले जाना ही समझदारी है। ढलानों वाले रास्तों और पुराने एवलांच प्रोन जोन से उचित दूरी बनाए रखना जीवन रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि बर्फ की परतें कब नीचे गिर जाएं, इसका अंदाजा लगाना कठिन होता है।
आपातकालीन किट और संचार साधनों की उपलब्धता
खराब मौसम की स्थिति में संपर्क टूटने का खतरा रहता है, इसलिए लोगों को अपने पास मोबाइल फोन, पावर बैंक, टॉर्च और प्राथमिक उपचार किट रखने की सलाह दी गई है। इसके अलावा, जरूरी दवाइयां और गर्म कपड़ों का स्टॉक भी अपने साथ रखें। प्रशासन द्वारा (Public Advisory Notices) के माध्यम से लगातार सूचनाएं प्रसारित की जा रही हैं। किसी भी संकट की स्थिति में जिला प्रशासन के हेल्पलाइन नंबर पर तुरंत सूचित करें और आधिकारिक निर्देशों का ही पालन करें ताकि किसी भी भ्रम की स्थिति से बचा जा सके।
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