उत्तर प्रदेश

UP Government – 68,000 कर्मचारियों का वेतन रुका, संपत्ति विवरण पर सख्ती बढ़ी

UP Government – उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य सेवा में कार्यरत 68 हजार से अधिक कर्मचारियों का वेतन अस्थायी रूप से रोक दिया है। प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लागू किए गए नियमों का पालन न करने के कारण यह कदम उठाया गया है। जिन अधिकारियों और कर्मचारियों ने अभी तक अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण “मानव संपदा पोर्टल” पर अपलोड नहीं किया, उन्हें जनवरी माह का वेतन जारी नहीं किया गया। सरकार का कहना है कि यह निर्णय किसी दंडात्मक मंशा से नहीं, बल्कि जवाबदेही और सुशासन को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है।

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राज्य कर्मचारियों की बड़ी संख्या और डिजिटल व्यवस्था
प्रदेश में आठ लाख से अधिक सरकारी कर्मचारी विभिन्न विभागों में कार्यरत हैं। इतने बड़े प्रशासनिक ढांचे में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सरकार ने डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संपत्ति विवरण जमा कराने की व्यवस्था लागू की है। “मानव संपदा पोर्टल” को केंद्रीय माध्यम बनाकर सभी कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड, पदस्थापन और अब संपत्ति संबंधी जानकारी को एकीकृत किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि इससे निगरानी आसान होगी और किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता पर समय रहते नजर रखी जा सकेगी।

निर्धारित समयसीमा और अनुपालन की शर्तें
सरकारी आदेश के अनुसार, कर्मचारियों को 31 दिसंबर 2025 तक अर्जित अपनी सभी चल-अचल संपत्तियों का विवरण 31 जनवरी 2026 तक ऑनलाइन दर्ज करना था। नियम स्पष्ट थे कि तय समयसीमा तक जानकारी न देने पर फरवरी में जनवरी का वेतन जारी नहीं किया जाएगा। कई विभागों ने पहले ही अपने अधीनस्थों को इस बारे में लिखित निर्देश दिए थे, फिर भी बड़ी संख्या में कर्मचारी निर्धारित अवधि के भीतर प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए।

मुख्य सचिव की चेतावनी और प्रशासनिक संदेश
कुछ दिन पहले मुख्य सचिव ने सभी विभागाध्यक्षों को पत्र जारी कर इस प्रक्रिया को गंभीरता से लेने का निर्देश दिया था। उन्होंने कहा था कि 31 दिसंबर 2024 तक की संपत्ति का विवरण 31 जनवरी तक पोर्टल पर अनिवार्य रूप से भरा जाना चाहिए। एक जनवरी से यह सुविधा सक्रिय कर दी गई थी, ताकि कर्मचारियों को पर्याप्त समय मिल सके। प्रशासन का संदेश साफ था कि यह महज औपचारिकता नहीं, बल्कि सेवा नियमों का अनिवार्य हिस्सा है।

पदोन्नति पर पड़ने वाला प्रभाव
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया था कि निर्धारित समयसीमा का पालन न करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। एक फरवरी 2025 के बाद होने वाली विभागीय पदोन्नति समितियों की बैठकों में ऐसे कर्मियों के नाम पर विचार नहीं किया जाएगा, जिन्होंने संपत्ति विवरण जमा नहीं किया। इस प्रावधान को अनुशासन और पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए जोड़ा गया है, ताकि अधिकारी समय पर अपने दायित्व पूरे करें।

आगे की राह और संभावित राहत
सूत्रों के अनुसार, जिन कर्मचारियों का वेतन रोका गया है, वे यदि जल्द ही पोर्टल पर विवरण दर्ज कर देते हैं तो उनका वेतन बाद में जारी किया जा सकता है। कई विभागों में तकनीकी सहायता केंद्र बनाए गए हैं, ताकि जिन कर्मचारियों को डिजिटल प्रक्रिया में कठिनाई हो रही है, उन्हें मदद मिल सके। सरकार का उद्देश्य सजा देना नहीं, बल्कि व्यवस्था को मजबूत करना है, ताकि सार्वजनिक सेवा में ईमानदारी और जवाबदेही बनी रहे।

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