ThreatCase – मथुरा ट्रस्ट अध्यक्ष को मिली धमकी, जांच में सामने आया विदेशी नंबर
ThreatCase – श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष आशुतोष ब्रह्मचारी को मिली जान से मारने की धमकी ने स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। ब्रह्मचारी ने आरोप लगाया है कि उन्हें और उनके वकील को बम से उड़ाने की चेतावनी दी गई है। इस मामले में सबसे अहम बात यह सामने आई है कि जिस नंबर से कॉल की गई, वह पाकिस्तान से जुड़ा हुआ पाया गया है, जिससे जांच का दायरा और गंभीर हो गया है।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका के बाद बढ़ा विवाद
बताया जा रहा है कि यह मामला एक कानूनी विवाद से जुड़ा है, जिसमें आशुतोष ब्रह्मचारी ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मिली अग्रिम जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की है। ब्रह्मचारी का कहना है कि जैसे ही उन्होंने इस मामले में सक्रिय रूप से पैरवी शुरू की, उन्हें धमकियां मिलने लगीं। 25 मार्च के बाद घटनाक्रम तेजी से बदला और दबाव बनाने की कोशिशें बढ़ीं।
फोन कॉल के जरिए दी गई गंभीर चेतावनी
शुक्रवार शाम करीब 5:53 बजे ब्रह्मचारी के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने सीधे तौर पर धमकी दी कि यदि उन्होंने अपनी याचिका वापस नहीं ली या कोर्ट में पैरवी जारी रखी, तो उन्हें और उनके अधिवक्ता को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इस कॉल ने पूरे मामले को संवेदनशील बना दिया है और इसे सामान्य धमकी से अधिक गंभीर माना जा रहा है।
पाकिस्तान कोड से जुड़ा नंबर, जांच तेज
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और तकनीकी जांच शुरू की गई। शुरुआती जांच में सामने आया कि कॉल जिस नंबर से की गई थी, उसमें पाकिस्तान का कोड दिखाई दे रहा है। शामली के पुलिस अधीक्षक नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि फिलहाल यह मामला डराने-धमकाने का प्रतीत होता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन होने के कारण सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, एजेंसियां सतर्क
धमकी मिलने के बाद आशुतोष ब्रह्मचारी ने पुलिस को लिखित शिकायत देकर अपनी सुरक्षा की मांग की है। उनका कहना है कि वह कानूनी प्रक्रिया के तहत अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं और ऐसी धमकियों से पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता। पुलिस ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और उनके आवास के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
इसके साथ ही खुफिया एजेंसियां भी इस मामले में सक्रिय हो गई हैं। कॉल के स्रोत, संभावित नेटवर्क और स्थानीय संपर्कों की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह सिर्फ डराने की कोशिश है या इसके पीछे कोई संगठित साजिश है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बढ़ी निगरानी
पूरे घटनाक्रम को देखते हुए प्रशासन सतर्क मोड में आ गया है। सुरक्षा एजेंसियां न केवल तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही हैं, बल्कि इससे जुड़े हर संभावित खतरे का आकलन भी किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।



